चित्रकूट/मानिकपुर। पाठा क्षेत्र के तुलसी जल प्रपात पर बने स्काई ग्लास ब्रिज में दरार आने की जांच के लिए रुड़की और प्रयागराज से विशेषज्ञ बुलाए गए हैं। साथ ही निर्माण एजेंसी को पेनाल्टी लगाने की तैयारी की जा रही है। निर्माण का पूरा 3.70 करोड़ भुगतान हो चुका है। इस पर जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाये गए हैं। इस कार्य का निरीक्षण कर तकनीकी जानकारी जुटाने के लिए रूडक़ी व प्रयागराज से विशेषज्ञों को बुलाया गया है।
मानिकपुर तहसील क्षेत्र के मारकुंडी में स्थित तुलसी जल प्रपात देखने के लिए हजारों लोग प्रतिवर्ष आते हैं। इस स्थान पर तीन साल के अंदर छह लोगों की डूबने से मौत भी हो चुकी है। पर्यटकों की सुरक्षा व आकर्षण के लिए वन विभाग व पर्यटन विभाग ने सुंदरीकरण की योजना बनाई। धनुषाकार स्काई ग्लास ब्रिज का ठेका गाजीपुर की पवनसुत कंपनी को दिया गया। तीन जुलाई को इसी पुल के कई पिलरों के पास दरारें आईं। चार व पांच जुलाई को अमर उजाला ने इस खबर को प्रमुखता से छापा। अमर उजाला की खबर को यूपी समाजवादी पार्टी के अधिकृत एक्स एकाउंट में टैग कर प्रदेश की भाजपा सरकार पर तंज कसा गया।
इसके बाद वर्तमान डीएम शिवशरणप्पा व वन विभाग के उपनिदेशक एनके सिंह कई इंजीनियरों के साथ मौके पर पहुंचे। डीएम ने कार्यदाई संस्था को ब्लैकलिस्टेड करने के निर्देश दिए। ब्रिज में आई खराबी की जांच विशेषज्ञों से कराने के लिए भी कहा। रविवार को रुड़की आईटीआई व प्रयागराज के एमएनआईटी के विशेषज्ञों की टीम बुलाई गई। टीम रिपोर्ट देगी कि ब्रिज सुरक्षित है या नहीं। रविवार को कार्यदाई संस्था के कई पदाधिकारी और इंजीनियर ब्रिज के पास पहुंचे। दरार वाले स्थान को दुबारा बनाने का काम शुरु किया है।
इस संस्था पर मानक की अनदेखी करने पर पेनाल्टी लगाने की तैयारी हो रही है। डीएम व उपनिदेशक (वन)ने इसका पूरा विवरण मांगा है। अभी यह ब्रिज तैयार बताया गया था लेकिन वन विभाग ने इसे हैंडओवर नहीं कियाहै।
भुगतान की होनी चाहिए जांच
मारकुंडी निवासी समाजसेवी सचिन वंदन त्रिपाठी ने कहा कि कंपनी को हैंडओवर के पहले पूरा भुगतान किये जाने की जांच होनी चाहिए। आरोप लगाया कि इसमें कमीशनबाजी का खेल है। जिम्मेदार अधिकारियों समेत कार्यदाई संस्था के पदाधिकारी शामिल हैं। इस कंपनी के खिलाफ जुर्माना लगाकर वसूली कराई जाए।