चित्रकूट। भारत रत्न नाना जी देशमुख की पुण्य तिथि पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन दीनदयाल शोध संस्थान के उद्यमिता विद्यापीठ सभागार में हुआ। इसमें पर्यावरण के अनुकूल ही विकास कार्य कराने और ग्रामीण क्षेत्र में होने वाले विकास कार्यों की चर्चा की गई।
सोमवार को सम्मेलन के समापन सत्र पर नार्वे के पूर्व पर्यावरण एवं अंतरराष्ट्रीय विकास मंत्री एरिक सोलहेन ने कहा कि आधुनिकता में अपनी पुरातन संस्कृति और जड़ को न भूलें। पर्यावरण के अनुकूल ही कार्य कराए जाएं। इससे गांव में रहने वाले स्वास्थ्य रहेंगे। सम्मेलन में दीन दयाल शोध संस्थान के प्रधान सचिव अतुल जैन,संगठन सचिव अभय महाजन ने कहा कि नाना जी ने पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए हमेशा कार्य किया है। योग, आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए चित्रकूट में कई कार्य किया है। सम्मेलन में निर्णय लिया गया कि जो भी सुझाव आए हैं उसकी जानकारी के लिए देश के प्रधानमंंत्री को पत्र भेजा जाएगा।
इस मौके पर दीनदयाल शोध संस्थान के अध्यक्ष वीरेंद्रजीत सिंह, महा प्रबंधक अमिताभ वशिष्ठ, सतना सांसद गणेश सिंह, पूर्व कुलपति प्रोफेसर नरेश चंद गौतम, रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के कुलपति कपिल देव मिश्रा, राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर के कुलपति डॉ. अरविंद शुक्ला, ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. भरत मिश्रा, बांदा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एनपी सिंह ने भी संबोधित किया।