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चित्रकूटः बाढ़ग़्रस्त गांवों में बीमारी फैलने का खतरा

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फोटो-4- मऊ में बाढ़ के बाद मवईकला गांव की स्थिति । संवाद - फोटो : CHITRAKOOT
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मऊ/राजापुर। यमुना नदी का जलस्तर आठ सेंटीमीटर की रफ्तार से कम हो रहा है। इससे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। जिन गांवों में पानी कम हो रहा है। वहां कीचड़-बदबू से लोग बेहाल हैं। बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है। उधर, तलहटी में बसे 20 गांवों के आसपास अभी पानी भरा हुआ है। किसानों की फसलें नष्ट हो चुकी हैं। गांवों में अभी अंधेरा छाया हुआ है।
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मऊ क्षेत्र में मवई कला, बरदहा, कोटराखंभा, घुरेटहा, बरवार, मंडौर, बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित है। इसी तरह से राजापुर क्षेत्र के अतरौली, नैनी, धौरहा, बरद्वारा, चांदी, बक्टा, हस्ता, बेलास, चिल्लीमल, सरधुआ गांव हैं। खोपा के जगरूप सिंह, सरधुआ से कमलेश निसाद, कुसैली के अनिल सिंह, अर्की के सुुनल सिंह ने बताया कि बाढ़ का पानी कम होने के बाद कीचड़ और बदबू से सांस लेना मुश्किल है। स्वास्थ्य विभाग की टीम दो दिन पहले आई थी और दवाएं बांटकर चली गई। उधर, सरधुआ-कमासिन, मंडौर समेत आधा दर्जन मार्गों पर अभी भी पानी भरा है। यहां के लोग नावों से आवागमन कर रहे हैं। वाहनों को दूसरे रास्तों से रवाना किया जा रहा है।
मवेशियों में दिखने लगे बीमारी के लक्षण
बाढ़ आने के बाद मवेशियों मेें बीमारी फैलने की आशंका बन पड़ी है। ग्रामीणों के मुताबिक कई मवेशियों ने खाना कम कर दिया है। ये लक्षण बीमारी के होते हैं। उन्हें दवाएं दी जा रही हैं।
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बिजली की आपूर्ति शुरू करने के लिए तेज किया काम
जलस्तर कम होने के बाद बिजली विभाग आपूर्ति के लिए युद्ध स्तर पर जुट गया है। विभाग का दावा है कि उपकरण सुधारे जा रहे हैं। एक-दो दिन के अंदर सब ठीक कर बिजली की आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी।
फसल बीमा क्लेम के लिए टोल फ्री नंबर
चित्रकूट। बाढ़ प्रभावितों जिन किसानों की फसलों का नुकसान हुआ है। अगर उन्होंने फसल बीमा कराया है। तो इसकी सूचना देने के लिए टोल फ्री नंबर 18008896868 है। यदि इस नंबर पर शिकायत दर्ज न हो तो तहसीलों व ब्लॉकों में बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों को पत्र देकर सूचना दे सकते हैं। यह जानकारी जिला समन्वयक सौरभ श्रीवास्तव ने दी।

मऊ में बाढ़ के बाद मवईकला गांव की स्थिति । संवाद- फोटो : CHITRAKOOT

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