विद्युत बिल संशोधित कर जमा धनराशि समायोजित करने के मामले में जारी नोटिस पर अधिशासी अभियंता व एसडीओ के हाजिर न होने पर जिला उपभोक्ता फोरम ने दोनों अधिकारियों के खिलाफ वारंट जारी किया है। इस मामले में एक अन्य अधिकारी की आपत्ति को भी फोरम ने खारिज कर दिया।
जिला उपभोक्ता फोरम के जज एस के श्रीवास्तव ने सोमवार को सन 2008 के विद्युत बिल मामले में तत्कालीन अधिशासी अभियंता सुनील चंद्र और शहर के एसडीओ वीके गंगवार के खिलाफ वारंट जारी किया है।
शहरवासी भवानीदीन यादव ने 2007 में बिजली का बिल आईडीएफ आने पर परिवारवाद दायर किया था। बताया था कि वह नियमित बिल जमा करने के बावजूद आईडीएफ बिल का संशोधन कराया जाए। इस पर फोरम ने 16 मई 2008 को न्यूनतम बिल जारी कर अधिक जमा धनराशि को आगामी बिलों में समायोजित कराने के आदेश दिए थे। जिस पर विभाग ने न्यूनतम बिल तो बना दिया, लेकिन धनराशि समायोजित नहीं की और राज्य उपभोक्ता फोरम में अपील कर दी। यह अपील खारिज हो गई।
इसके बाद जिला उपभोक्ता फोरम ने दोनों अधिकारियों के खिलाफ नोटिस जारी कर दी, लेकिन दोनों अधिकारी फोरम के सामने हाजिर नहीं हुए। इस बीच वर्तमान अधिशासी अभियंता राजमणि विश्वकर्मा ने आपत्ति दाखिल की। जिस पर सोमवार को फोरम ने आपत्ति खारिज कर आदेश दिया।
इसके खिलाफ अपराधिक मामला बनता है या तो वह स्वयं अथवा अपने अधिवक्ता के माध्यम से आपत्ति कर सकते हैं। पदेन अधिकारी को ऐसी आपत्ति करने का अधिकार नहीं है। अदालत में न आने पर तत्कालीन अधिशासी अभियंता व उपखंड अधिकारी के खिलाफ वारंट जारी किया है।