मानिकपुर(चित्रकूट)। मारकुंडी थाना क्षेत्र के डोडा गांव से सटे देवीदीन का पुरवा में गुरुवार देर रात आधा दर्जन असलहधारी बदमाशों ने पांच लोगों को पीट-पीटकर अधमरा कर दिया। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। एसपी और एएसपी ने घटनास्थल की जांचकर अस्पताल में पीड़ितों से पूछताछ की। बदमाशों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
देर रात घुसे बदमाशों ने खेत की रखवाली कर रहे शिवप्रसाद पुत्र कुंजबिहारी व उसके भाई शिवनाथ को उठाकर गांव के भोल्ली यादव का पता पूछा। इसके बाद दोनों के कपड़े उतारे और लाठियों व असलह की बटों से पीटकर दोनों को खेत पर ही छोड़ गए। इसके बाद बदमाश कुछ दूर पर बेटू उर्फ राजेश्वर पुत्र बच्चीलाल के घर पहुंचे। यहां बेटू व उसकी मां कुट्टी देवी को पीट दिया। भागते समय बदमाशों ने मंदिर के पुजारी संता पुत्र मोइला को भी असलहे की बट से पीटा। ग्रामीणों की सूचना पर देर रात एसपी प्रताप गोपेंद्र सिंह, एएसपी बलवंत चौधरी, मारकुंडी थानाध्यक्ष जयनारायण सिंह पहुंचे।
घायलों को सीएचसी मानिकपुर में भर्ती कराया गया। इसके बाद पुलिस ने ग्रामीणाें से पूछताछ की। एक टीम बदमाशों की तलाश में जंगल की ओर भी गई लेकिन कोई नहीं मिला। इस मामले में किसी बडे़ दस्यु गैंग का हाथ होने की आशंका नहीं जताई गई है। एसपी ने बताया कि ग्रामीण बदमाशों का न तो हुलिया बता रहे हैं और न ही किसी के होने का शक जता रहे है। जिस तरह बदमाशों ने मारपीट की है, उससे किसी गैंग के होने की संभावना कम है, बल्कि पीड़ितों की बदमाशों से कोई रंजिश लग रही है। नवंबर में भी इसी परिवार के सदस्यों की कुछ लोगों ने पिटाई की थी। पुलिस हर मामले में जांच कर रही है
हमले के पीछे रंजिश तो नहीं
चित्रकूट (ब्यूरो)। पीड़ितों के अनुसार आधा दर्जन बदमाश तो थे, लेकिन पांच के हाथ में सिर्फ लाठी थी और एक के पास बंदूक थी। पिटाई के दौरान बदमाशों ने कुछ लोगों को ही पीटा है, जिससे घायलों की रंजिश की बात मानी जा रही है। पाठा क्षेत्र में पांच लाख 30 हजार के इनामी डाकू बबुली कोल और एक लाख के इनामी डाकू गौरी यादव समेत रजुआ गैंग की दहशत है। हाल ही में डाकू रजुआ ने हरदौली गांव (मप्र) से दो किसानाें का फिरौती के लिए अपहरण किया है। जिनका अभी तक पता नहीं चल सका है। पुलिस मुठभेेड़ के बाद बबुली कोल गैंग भी अब धीरे-धीरे फिर बीहड़ में सक्रिय हो रहा है।
जानकारी के अनुसार पीड़ितों के कुछ रिश्तेदार सतना (मप्र) में रहते हैं। जिनके पहले नामी डाकू छत्रपाल से संबंध रहे हैं। उस गैंग की एक बंदूक गायब हुई थी जिसे ढूंढते हुए गैंग के लोग इस गांव आ चुके हैं। एसपी प्रताप गोपेंद्र के अनुसार डाकू छत्रपाल गैंगवार में ही मारा गया था। उसका कंकाल जंगल में मिला था। उसकी दो दिन बाद शिनाख्त हो सकी थी।