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एसटीएफ ने बिछाया जाल लेकिन सबके हाथ खाली

Wed, 05 Sep 2018 10:45 PM IST
एसटीएफ ने बिछाया जाल लेकिन सबके हाथ खाली
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घटना के तीन दिन बाद भी भयभीत अवस्था में जानकारी देते पनहाई स्टेशन मास्टर अवनीश कुमार - फोटो : amarujala
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अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट। गंगा कावेरी सुपरफास्ट ट्रेन में लाखों की डकैती मामले में तीन दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। एसटीएफ ने अपना जाल जरूर बिछाया है, जीआरपी व आरपीएफ की टीमों ने कुछ स्थानों पर छापेमारी की लेकिन सफलता अभी दूर है। डकैती में शामिल किसी भी आरोपी की परछाई तक पुलिस नहीं ढूंढ पाई है। सुरक्षा की बातें और पुलिस चौकी खोलने का दावा भी खोखला नजर आया। पनहाई स्टेशन पर सन्नाटा पसरा है ड्यूटी में मौजूद कर्मचारियों का कहना है कि लगता है कहीं फिर न कोई ट्रेन पर डकैती पड़ जाए। स्टेशन पर कोई सुरक्षाकर्मी नहीं है। रात को सिर्फ एक सिपाही ड्यूटी पर आता है जो सुबह चला जाता है।
  मुंबई हावड़ा रेलमार्ग के पनहाई रेलवे स्टेशन के आउटर पर सिग्नल लाल कर  व चैन पुलिंग कर गंगा कावेरी एक्सप्रेस की स्लीपर बोगियाें में लाखों की डकैती की घटना के तीन दिन बीत गए हैं। ड्यूटीरत कर्मचारियों के चेहरे पर अभी भी भय नजर आता है। जीआरपी आईजी बीआर मीणा ने मंगलवार को कहा था कि पनहाई स्टेशन पर अस्थाई पुलिस चौकी खुलेगी लेकिन बुधवार को एक भी सिपाही नजर नहीं आया। स्टेशन मास्टर अवनीश कुमार ने बताया कि अभी तक तो कोई चौकी नहीं खुली है। जिससे रात को बेहद डर लगता है। जब यात्री गाड़ी निकलती है तो 10-15 किमी दूर तक आशंका बनी रहती है कि कहीं फिर न डकैती पड़ जाए। पूरे स्टेशन पर सन्नाटा पसरा रहता है। रात को तो केबिन से बाहर ही नहीं निकलते।
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  बुधवार को जीआरपी आईजी के इलाहाबाद लौटने के बाद जीआरपी एसपी पीके मिश्रा की अगुवाई में कई स्थानों पर छापेमारी की गई। आरपीएफ प्रभारी आेंकार नाथ त्रिपाठी की टीम ने भी कुछ संदिग्धों से पूछताछ की। सिविल पुलिस मानिकपुर थानाध्यक्ष केपी दुबे ने बताया कि पकड़े गए पुराने ट्रेन में चोरी के आरोपियों से पूछताछ जारी है। तीन दिन बाद भी पुलिस के हाथ लाखों की डकैती में शामिल एक दर्जन से अधिक लोगों में एक की परछाई भी हाथ नहीं लगी है।

पुलिस चौकी खोलने की बात हवाहवाई
मानिकपुर। पुलिस चौकी खोलने की बात बुधवार को हवाहवाई साबित हुई। स्टेशन मास्टर ने बताया कि इटारसी पैसेंजर से एक जीआरपी सिपाही रात 11 बजे आता है। सुबह इसी इटारसी पैसेंजर से ड्यूटी कर इलाहाबाद लौट जाता है। इसके अलावा स्टेशन के आसपास किसी पुलिस टीम के सदस्य का मूवमेंट नहंी रहा।

दो बार ग्रीन सिग्नल, फिर चेन पुलिंग कर डकैती


चित्रकूट। मुंबई-हावडा रेल मार्ग पर लाखों की ट्रेन डकैती के बाद सबसे बड़ा सवाल सामने आ रहा है कि डकैतों ने आखिर सिग्नल कैसे रेड कर दिया जिससे ट्रेन रूकने को मजबूर हुई। दो बार स्टेशन मास्टर ने ग्रीन सिग्नल किया। दूसरी बार जब ग्रीन सिग्नल हुआ तो ट्रेन आगे बढ़ी लेकिन फिर चेन पुलिंग कर ट्रेन रोककर डकैती डाली गई।
गंगा कावेरी ट्रेन में डकैती की जांच पुलिस की कई टीमें कर रहीं हैं। रेल अधिकारियों से लेक र भारत सरकार के रेल मंत्रालय ने इसकी रिपोर्ट मांगी है। अभी तक प्रथम दृष्टया बुधवार चौंकाने वाले कारण सामने आए। स्टेशन मास्टर अवनीश कुमार ने बताया कि रात को जब गंगा कावेरी ट्रेन स्टेशन से पास हुई तो वह गेट से अंदर आकर केबिन में बैठे। उन्होंने देखा कि आगे का सिग्नल रेड शो कर रहा है। आटोमेटिक सिग्नल सिस्टम में यह होता है कि दो मिनट बाद सिग्नल संकेत देता है कि वह रेड है। संकेत मिलते ही उन्होंने फिर ग्रीन सिग्नल किया था। जिससे ट्रेन आगे बढ़ गई थी लेकिन कुछ दूर बाद ही ट्रेन की चेन पुलिंग कर डकैतों ने घटना को अंजाम दिया है।

ऐसे होता सिग्नल रेड़
चित्रकूट। पीडब्ल्यूआई सौरभ कुमार ने बताया कि वैसे तो आटोमैटिक सिस्टम में सिग्नल रेड या ग्रीन करना आसान नहीं है। लेकिन कुछ जानकार ही इसे कर देते हैं। यह कुछ देर के लिए होता है। सिग्नल वाली लाइन की दो पटरियों के बीच लोहे की राड या तार टचकर करने से शार्ट सर्किट होता है। ऐसे में पोल में सिग्नल की ओर जा रही तार पर भी धातु टच कराने से सिग्नल रेड हो जाता है। यह प्रक्रिया बेहद जटिल है इसे पहले से जानने वाले ही कर सकते हैं। इस घटना में कुछ लोग इसके जानकार जरूर होंगे।
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एसपी बोले जल्द पकड़े जाएंगे डकैत
मानिकपुर। जीआरपी एसपी पीके मिश्रा व आरपीएफ प्रभारी ओंकार नाथ त्रिपाठी ने बताया कि बुधवार को कुछ अहम जानकारी मिली हैं। उसी के आधार पर छापेमारी की जा रही है। फिलहाल अभी सफलता नहीं मिली है लेकिन जल्द ही ट्रेन डकैती में शामिल डकैतों को पकड़ा जाएगा।


 
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