चित्रकूट। भरतकूप क्षेत्र में लीज पर ली गई पत्थर की खदानों का ठेक ा लेने वाले ठेकेदार कई खदानों का अपना काम पेटी कांट्रेक्टरों को दे रखा है। जो खनिज विभाग के नियमों के मानक के विपरीत खनन का कार्य कर रहे हैं। जिससे उनकी अच्छी खासी कमाई हो रही है।
भरतकूप क्षेत्र के आसपास रौली कल्याणपुर के वजनी, भौरा, कोरारी बीदर पहाड़ सहित 35 खदानों की लीज पट्टा धारक हैं। जिनमें दर्जनों खदानों को ठेकेदारों ने पेटी कांट्रेक्टरों के माध्यम से कार्य करा रहे हैं। जिससे वह मानक के विपरीत सरकारी शासनादेशों की अनदेखी कर अवैध तरीके से खनन कर रहे हैं।
इस मामले को लेकर सुनीता देवी पत्नी राजकुमार वर्मा ने मुख्यसचिव व आयुक्त चित्रकूट धाम सहित जिलाधिकारी को पत्र भी भेजा है। जिसमें बताया गया है कि ज्यादा कमाई के चक्कर मे दिन रात पोकलैंड मशीनोें व जेसीबी मशीने लगाकर ब्लास्ंिटग से वन क्षेत्र में अवैध खनन किया जा रहा है। इससे प्राकृतिक सुन्दरता नष्ट हो रही है। ब्लास्टिंग होने के कारण आए दिन पत्थर तोड़ने वाले मजदूर दुर्घटना के शिकार होते हैं। जिससे क्षेत्र के ग्रामीणों में नाराजगी है।
इस मामले में अपर जिलाधिकारी विजय नारायण पांडेय ने कहा कि पट्टा जिसको आवंटित हो वही काम करा सकता है। पट्टे को दूसरे कोे देना भी गलत है। इसकी जांच कराई जाएगी। इसके अलावा अवैध खनन रोकने के लिए प्रशासन लगातार कार्रवाई कर रहा है।
जिला खनिज अधिकारी शैलेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि सिर्फ पट्टाधारक ही नियमानुसार खनन व तोड़ान का काम कर रहे हैं। विभाग ने लगातार अवैध काम करने वालों के खिलाफ अभियान चलाया गया है।
खनन के पट्टे पर किया कब्जा
:- पट्टा धारक परेशान
चित्रकूट। भरतकूप निवासी रामेंद्र कुमार गौतम ने जिलाधिकारी को दिए पत्र में आरोप लगाया है कि उसको चार एकड़ का पट्टा खनन कार्य के लिए एक पट्टाधारक से हजारों रुपयों में लिखित लीज पर लिया था। अब उसमें काम शुरु होने वाला है तो पट्टाधारक ने उसे अधिक रुपये लेकर दूसरे के नाम कर दिया है जिससे उसका लाखों का नुकसान हो रहा है।
यह पेटी कांट्रेक्टर खदान में चार इंच का होल करारकर ब्लास्ंिटग करा दिया है। जो पूरी तरह से अवैध है। पत्र में उन्होने बताया कि उसे 19 मार्च 2020 तक के लिए पट्टा दिया गया था। जिसमें उसने मिट़्टी की सफाई व रास्ता बनाने में लाखों रुपये खर्च किए।
पर्यावरण एनओसी की औपचारिकता के बाद पुन: पट्टा बहाल तो हो गया लेकिन पूर्व पट्टाधारक अब उसके साथ धोखाधडी कर रहा है। इस मामले में जांच कर कार्रवाई की जाए।