चित्रकूट। जिले के पाठा क्षेत्र के जंगलों से भी जंगली जानवरों का कई साल से शिकार किया जा रहा है। जिसमें जंगल के आसपास रहने वाले कुछ आदिवासी बिजली के तारों में करंट दौड़ाकर जानवरों को मार रहे हैं। इसके बाद उनकी कीमती खाल व हड्डियाें को निकालने के बाद अंतरप्रांतीय गिरोह के सदस्यों को बेच देते हैं।
जंगल में डाली जाने वाले बिजली के तारों में करंट लगने से कई ग्रामीणों की भी मौत हो चुकी है। इसके बाद भी ऐसे लोगों का पता लगाने की कोशिश न तो वन विभाग ने किया न तो पुलिस अधिकारियों ने।
जिले के पाठा क्षेत्र चीता, भालू, हिरन, गीदड़, सांभर, नील गाय आदि कई तरह के जानवर पाए जाते हैं। जिनका शिकार जंगल के आस रहने वाले कुछ आदिवासी कई साल से कर रहे हैं। इनको मारने के लिए बिजली के नंगे तार डाल कर उसमें करंट डाल चालू कर देते हैं।
जिससे जब कभी बिजली के तार के ऊपर से कोई जानवर गुजरता है। तो करंट से उसकी मौत हो जाती है। इस तरह से जानवरों की मौत हो जाने के बाद उसकी खाल, खोपड़ी व हड्डियां निकालकर अंतरप्रांतीय गिरोह के सदस्यों को बेच देते हैं।
जंगलों में खुले बिजली के तार डालने से रानीपुर,गिदुरहा, डोडा मापी, हरदीकला, मारकुंडी क्षेत्र के गांवों के कई ग्रामीण भी करंट की चपेट आ चुके हैं। पिछले साल मारकुड़ी क्षेत्र में एक चरवाहे की मौत हो गई थी। कहा जाता है कि जंगली जानवरों का शिकार करने वालों के तार अंतरप्रांतीय गिरोह से भी हो सकते हैं।
जिसके लिए जंगलों में जानवरों का शिकार करने वाले आदिवासियों पर कार्रवाई कर गिरोह के सदस्यों का भी पता लगाया जाए। जिससे जंगली क्षेत्र में बसे जानवरों को बचाया जा सके।