चित्रकूट। ग्रामीणों के हाथों मारे गए इनामी राजू ठाकुर का पोस्टमार्टम बुधवार को हुआ। आखिरकार बदनसीब पिता को ही उसे कंधा देना पड़ा। उसके डकैती जीवन से कोई वास्ता न रखने वाले पिता की आंखे अंतिम समय नम हो गईं और बोला कि राजू को कई बार समझाया लेकिन नहीं माना। यह उम्मीद थी कि उसके शव को पुत्र कंधा देेगा लेकिन उसके कुकृत्यों के कारण पिता को ही कंधा देना पड़ा।
गौरतलब है कि भरतकूप चौकी क्षेत्र के भगवतपुर गांव में सोमवार की रात में बरातियों को नाचने से मना करने के दौरान विवाद होने पर डाकू राजू ठाकुर गैंग ने दुल्हन के चचेरे भाई को गोली मार दी थी। जिसके बाद ग्रामीणों ने उसे घेरकर मार डाला था।
मंगलवार को मृत डाकू का शव दिनभर मुख्यालय में पड़ा रहा ग्रामीणों ने तो उसकी शिनाख्त कर दी थी लेकिन पुलिस पंचनामा नहीं भर पाई थी। उसका शव लेने के लिए कोई तैयार नहीं था। बुधवार को डाकू का पिता संतोष सिंह को पुलिस पोस्टमार्टम लेकर आई और मृतक की शिनाख्त कराकर पंचनामा भरा।
पोस्टमार्टम के बाद बुधवार की शाम को पुलिस की मौजूदगी में मुख्यालय के पुरानी बाजार मंदाकिनी किनारे घाट में मृत डाकू के पिता ने अंतिम संस्कार किया। इस दौरान मृत डाकू का चचेरा भाई राहुल निवासी कोहनी भी मौजूद रहा।
इसके बाद उसके पिता ने कहा कि गलत संगत से उसका इकलौता पुत्र राजू डाकू बन बैठा। उससे कई बार इस काम को बंद करने को कहा लेकिन वह नहीं माना। इस दौरान उससे एक बार मुलाकात में कहा था कि इस गांव से दूर चले जाओ। इस गांव और आसपास के लोगाें को परेशान करना सही नहीं है। यहीं उनका परिवार रहता है। यही सब करना है तो कहीं और भाग जाओ ताकि पुलिस व समाज उन्हें (पिता)परेशान न करें। इसके बाद उसकी आंखों से आंसू बहने लगे।