चित्रकूट। नवोदित डाकू सरगना राजू ठाकुर का आतंक महज छह माह तक ही रहा लेकि न सबसे ज्यादा उत्पीड़न उसी क्षेत्र के ग्रामीणों का हुआ। जिस क्षेत्र में वह रहता था। संभवत: उसे लगता था कि यह उसका इलाका है तो उसे यहां सब कुछ करने की छूट है। इसी कारण कई बार ग्रामीणों ने उसकी हरकतों को अनदेखा भी किया।
लगातार वारदातों से तंग आकर उसे उसी गांव में घेरकर मार डाला गया। जहां वह 13 साल पहले आया था।
मारपीट कर बाद में रुपये लाने को कहता था
भरतकूप । अपहरण और मारपीट कर रुपये लूटने का काम प्रमुखता से यह गैंग करता था। पिछले माह हुड़ा गांव से ओमकार यादव का अपहरण कर 50 हजार फिरौती वसूली थी। इसके बाद आधी फिरौती की रक म फिर लेने के लिए गांव में धावा भी बोला था। रसिन व आसपास गांव के ग्रामीणों का कहना है कि मारपीट के दौरान राजू ठाकुर अक्सर ग्रामीण की जेब में पड़े रुपये छीनने के बाद दोबारा उसी मार्ग से गुजरने के एवज में फिर रुपये लेकर आने की बात कह कर उसे छोड़ता था।
शराबी व रंग मिजाजी था
भरतकूप। डाकू राजू ठाकुर के मारे जाने के बाद क्षेत्रवासी खुश हैं। यहां तक कि उसके पिता ने कहा कि बुरे काम का उसे बुरा नतीजा मिला है। कई बार उसे इन वारदातों से दूर रहने के लिए समझाया गया लेकिन वह नहीं माना। ग्रामीणों ने बताया कि कई महीने से उसकी शराब व शबाब की ज्यादा आदत पड़ गई थी। इसी कारण उसकी मौत हुई।
बचे गैंग के साथियों से खतरा
भरतकूप। इस वारदात के दौरान गैंग के पांच सदस्य मौजूद थे। जिनके पास राइफल व कट्टा है। सरगना के मारेजाने के बाद बचे सदस्य मामा पटेल और टेणमुहा के अलावा दो अज्ञात सदस्यों को जल्द न पकड़ा गया तो वह ग्रामीणों पर हमला कर सकते हैं। भगवतपुर के रज्जू सोनकर ने बताया कि बचे गैंग के सदस्यों से खतरा है।
फिरौती की रकम से खरीदी थी राइफल
चित्रकूट। राजू ठाकुर गैंग में दो राइफल व दो तमंचा होने की पुलिस ने पुष्टि की है। जानकारी के अनुसार हाल ही में फिरौती से मिले 50 हजार रुपये से गैंग ने चोरी की राइफल खरीदी थी। भरतकूप चौकी प्रभारी सुजीत कुमार के अनुसार भागे सदस्यों के पास एक राइफल व तमंचा हैं।