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अदालत ने मां-बेटे को सुनाई तीन-तीन साल कारावास की सजा

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मां-बेटे को तीन-तीन साल कारावास की सजा
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अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट। आत्महत्या के लिए प्रेरित करने के मामले में अपर जिला जज ने मां-बेटे को तीन-तीन साल कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
अभियोजन अधिकारी श्रीराम यादव ने बताया कि मध्य प्रदेश के रींवा जिले के सेमरिया थाने के बरा निवासी गोरेलाल पुत्र रामाधार ने मई 2012 में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनकी पुत्री प्रीतू की शादी राजापुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत बरद्वारा गांव के निवासी उमाकांत के साथ हुई थी। उसकी पुत्री को ससुराली जन कम दहेज मिलने के कारण प्रताड़ित करते थे। लड़की का पति उमाकांत उसे मायके नही भेजता था और मारपीट करता था। 24 अप्रैल 2012 को वादी के पुत्र की शादी थी। इसके चलते वह 23 अप्रैल 2012 को अपनी पुत्री को विदा कराने बरद्वारा गया था लेकिन ससुराली जनों ने नही भेजा और कहा कि 24 अप्रैल को निमंत्रण पर आने पर उसको भी साथ ले आएंगे। इसके बाद 25 अप्रैल 2012 को मोबाइल के जरिए उसे सूचना दी गई कि उसकी लड़की की मृत्यु हो गयी है। वादी के बरद्वारा पहुंचने के पहले ही ससुराली जनों ने बिना पुलिस को सूचना दिए साक्ष्य नष्ट करने के मकसद से अंतिम संस्कार करा दिया। जिसकी शिकायत उसने थाने में दी लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट नही दर्ज की। न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने इस मामले में रिपोर्ट दर्ज करने के बाद आरोप पत्र दाखिल किया था।
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बचाव और अभियोजन पक्ष के अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद शनिवार को अपर जिला जज कुसुमलता ने मृतका के पति अभियुक्त उमाकांत और मृतका की सास राजरानी को तीन-तीन वर्ष कठोर कारावास की सजा तथा आठ-आठ हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है।
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