अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट/मानिकपुर। पाठा के जमुनिहाई जंगल में साढ़े पांच लाख के इनामी डाकू बबुली कोल गैंग से हुई पुलिस मुठभेड़ छह माह पूर्व निही चिरैया जंगल में हुई मुठभेड़ की फोटो कापी जैसी ही लगती है। 24 अगस्त 2017 को इसी गैंग से पहली मुठभेड़ में भी गोली लगने से घायल पंाच हजार का इनामी डाकू राजू कोल पकड़ा गया था और अब तीन फरवरी को इसी गैंग से दूसरी मुठभेड़ में भी यही कहानी दोहराई गई।
हालांकि पहली मुठभेड़ में पुलिस को तगड़ा झटका लगा था और डकैतों की गोली से दरोगा जेपी सिंह शहीद हो गए थे। इस बार किसी सिपाही को खरोंच तक नहीं आई। पहली बार डाकू राजू के पैर में एक गोली लगी थी इस बार जियालाल के दो गोली बाएं पैर- हाथ में लगी है।
ग्रामीणों में चर्चा है कि अक्सर मुठभेड़ों में डकैत सरगना बच निकलते हैं और प्यादे ही हत्थे चढ़ रहे हैं। पुलिस के हत्थे चढ़ा डकैत लवलेश कोल का मामा और 25 हजार का इनामिया बताया गया है। गौरतलब है कि बीते साल 24 अगस्त की सुबह मानिकपुर के निही चिरैया जंगल में डाकू बबुली कोल गिरोह से पुलिस की भीषण मुठभेड़ हुई थी। मुठभेड़ में तत्कालीन रैपुरा थाने के एस आई जय प्रकाश सिंह डकैतों की गोली लगने से शहीद और बहिलपुरवा थानाध्यक्ष वीरेन्द्र त्रिपाठी गोली लगने से घायल हुए थे। इस मुठभेड़ के बाद पुलिस पांच दिन तक जंगल में घेराबंदी किए रही लेकिन गैंग सरगना का ठिकाना नहीं तलाश सकी थी। यह जरूर हुआ था कि 10 दिन बाद तीन सितंबर को पुलिस ने गिरोह के 12 हजार के इनामी डाकू शारदा कोल को मारकर शहीद दरोगा का हिसाब बराबर कर लिया था।
इस मुठभेड़ के लगभग छह माह बाद शनिवार की सुबह बबुली कोल गिरोह और पुलिस का फिर आमना सामना हो गया। मारकुंडी थाना क्षे्त्र के जमुनिहाई और अमरावती के जंगल में शनिवार तड़के गोलियों की गड़गड़ाहट के बीच ग्रामीणों की नींद टूटी। मीडिया सक्रिय हुआ तो दोपहर बाद बताया गया कि मुठभेड़ में बबुली व लवलेश कोल का मामा नागर गांव निवासी जियालाल पैर में गोली लगने के बाद राइफल के साथ गिरफ्तार किया गया है।
डकैत सरगना पुलिस घेराबंदी से बचकर साथियों के साथ बच निकला। डकैतों की तलाश में यूपी-एमपी पुलिस की कई टीमें जंगल में कांबिंग कर रहीं है। यह कोई नई बात नही है कि मुठभेड़ में डकैत बच निकले हों। इस तरह की सैकड़ों मुठभेंडे इसकी गवाह हैं। कई बार पुलिस को मुठभेड में सराहनीय सफलता मिली हैं। बबुली कोल गिरोह की ताजा मुठभेड़ और पिछली मुठभेड़ की तुलना करें तो दोनों में कोई खास फर्क नहीं मिलेगा। वहां भी तड़के भिडंत हुई थी और यहां भी तड़के मुठभेड़ हुई। दोनो ही मुठभेड़ों में गैंग सरगना बच निकला और गोली लगने के बाद दो डकैत पकड़े गए।
-दोनों बार एक डकैत घायल हुआ और भाग निकला सरगना