आधुनिक तकनीक से लैस पुलिस फेल, भगवान तेरा सहारा
अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट। दिनदहाड़े जानकीकुंड स्कूल परिसर से दो नकाबपोश बदमाशों ने तेल उद्यमी के जुड़वा बेटों का अपहरण कर जो सनसनी फैलाई वह दो दिन बाद भी दिखाई पड़ती है। भुक्तभोगी परिवार के सदस्यों को पुलिस के प्रयास से शिकायत नहीं लेकिन यह कहने से नहीं चूक रहे कि आधुनिक तकनीक से लैस पुलिस के सारे प्रयास बेकार साबित हो गए हैं। भगवान के मंदिरों में परिजन माथा टेक कर अपहृत मासूमों की खैरियत की प्रार्थना कर सकुशल वापसी की राह तक रहे हैं। मप्र के पुलिस अधिकारियों ने गुरुवार को पीड़ित परिजनों से मिलकर कई जानकारी ली और जल्द ही दोनों को सकुशल बरामद करने का आश्वासन दिया है। यूपी-एमपी के पुलिस अधिकारी कह रहे हैं कि घटना में किसी बडे़ डाकू गैंग का हाथ नहीं है लेकिन स्पष्ट कारण नहीं तलाश पा रहे हैं। पुलिस का मानना है कि यदि रुपये के लिए अपहरण किया होता तो एक बालक को ही पकड़कर ले जा सकता था क्योंकि बाइक में दोनों बालकों को ले जाना परेशानी का भी सबब बन सकता था।
सनसनीखेज अपहरण कांड के बाद भागवतधाम के नवलेश दीक्षित, महंत दिव्यजीवन दास, महंत राजकुमार दास, महंत सुखरामदास व कामदगिरी के संत मदनदास आदि ने गहरा आक्रोश जताया है। इनका कहना है कि दिनदहाड़े दो मासूम को बाइक से ले जाने वालों को भारी पुलिस बल भी तलाश नहीं कर पा रहा है। जिससे तीर्थक्षेत्र की छवि भी बिगड़ सकती है।
35 लाख की फिरौती मांगने की चर्चा
खोही। दो दिन से ज्यादा का समय होने के बाद अपहरणकर्ताओं का कुछ पता न चलने पर गुरुवार को ज्यादातर लोगों ने कहा कि 35 लाख रुपये की फिरौती मांगी गई है। पुलिस के दबाव के कारण परिजन उसे सही स्थान तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं। हालांकि इसकी किसी परिजन ने पुष्टि नहीं की। अपहृत बच्चों के पिता बृजेश रावत ने कहा कि उन्हें इसकी बिल्कुल जानकारी नहीं है। उनके पास फिरौती मांगने की कोई सूचना नहीं है। सतना एसपी संतोष गौर ने बताया कि उन्हें भी किसी परिजन या रिश्तेदार ने फिरौती मांगने की जानकारी नहीं दी है। पुलिस बच्चों को सकुशल छुड़ाने के लिए कुछ नरम रूख अपना रही है ताकि बच्चों को नुकसान न होने पाए।
यूपी से 12 संदिग्धों को पकड़ किया मप्र पुलिस के हवाले
चित्रकूट। एसपी मनोज कुमार झा ने बताया कि अब तक तो लगता है कि यह व्यापारिक प्रतिस्पर्धा या पुरानी रंजिश का मामला है। बबुली डाकू गैंग की वारदात की संभावना पर पूरा जंगल छाना गया अब स्पष्ट हो गया है कि डकैतों द्वारा यह घटना अंजाम नहीं दी गई। इस संबंध में यूपी क्षेत्र के 12 संदिग्ध लोगों से पूछताछ कर मप्र पुलिस के हवाले किया गया है ताकि वह भी इनसे कुछ जानकारी ले सके। यूपी एमपी पुलिस की संयुक्त टीम का प्रयास जारी है। इसके बाद भी पुलिस नामी डकैतों और उनके परिजनों पर नजर रखे है‘लेकिन अभीतक कुछ ऐसा संदेह नहीं मिला है।