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सीमा क्षेत्र में डाकुओं की चहलकदमी से ग्रामीणों में दहशत

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चित्रकूट। जिले की सीमा से सटे मध्यप्रदेश की पुलिस भले ही डाकुओं को मारने का दंभ भर रही है लेकिन जिस तरह से डाकू ललित पटेल ने तीन ग्रामीणों की हत्याकर शव जला दिए और फिर आठ दिन बाद एक प्रधानाध्यापक का गांव में घुसकर अपहरण किया। उससे पुलिस विभाग की मुश्तैदी की पोल खुलने लगी है। दरअसल सीमा से जुड़े होने के कारण डकैतों का प्रभाव पहले से प्रभावित चित्रकूट जिले के क्षेत्र में भी पड़ता है।
गौरतलब है कि डाकू ललित पटेल ने 1/2 जुलाई की रात को तीन ग्रामीणों की जंगल में हत्या करने के बाद शव को जला दिया था। इस कांड के होने के बाद यूपी-एमपी पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे थे। जिन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया था कि डाकू ललित पटेल सहित अन्य डाकुओं सहित अन्य डाकूओं को बहुत जल्द ढेर कर दिया जाएगा। इसके बाद जंगल में पुलिस अधिकारियों व पुलिस बल ने जंगल में कांबिंग भी की लेकिन शायद डकैतों पर इसका प्रभाव नहीं पड़ा और उसी दौरान डाकू ललित पटेल ने जिले की मप्र सीमा से लगे बरौंधा गांव से एक प्रधानाध्यापक का अपहरण कर लिया।अपहरण के बाद दोनाें प्रदेश की पुलिस ने दावा किया था कि प्रधानाध्यापक को छुड़ा लिया जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ग्रामीणों का दावा है कि सात दिन बाद प्रधानाध्यापक को फिरौती की रकम देने के बाद ही डाकुओं ने छोड़ा। जिससे पुलिस से ग्रामीणों का विश्वास कमजोर होता जा रहा है। ग्रामीण राजकरण मुकेश तिवारी, अरुण आदि ने बताया कि पुलिस पर जब दबाव पड़ता है तब पुलिस अधिकारी अधिक सक्रिय होते है।
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चित्रकूट। जानकारों का मानना है कि डाकु ओं को मारने के लिए जिले की पुलिस व सीमा से लगे मप्र की पुलिस जब साझा अभियान चलाएगी उसी से सफलता मिल सकती है। इस संबध में सतना एसपी राजेश हिंगडकर ने बताया कि डाकू ललित पटेल गैंग बेहद कमजोर है जल्द ही गैंग के बचे सदस्यों पर शिकंजा कसा जाएगा। सीमाक्षेत्र का डकैत लाभ तो उठाते हैं लेकिन चित्रकूट व बांदा की पुलिस से मिलकर समस्या का समाधान किया जाएगा।
सीमा क्षेत्र में डाकुओं की चहलकदमी से ग्रामीणों में दहशत
:- डाकू ललित पटेल गैंग ने दस दिनों में की दो बड़ी घटनाएं
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