चलती ट्रेन में दौड़ने में माहिर लूलू
अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट। जिले के बरगढ़ थाना क्षेत्र गजरिया निवासी अजायब सिंह का पुत्र लूलू पटेल उर्फ लुलुआ उर्फ रामसिया 50 हजार का इनामी बदमाश किशोरावस्था से ही अपराध की दुनिया में कदम रख चुका था। 13 साल पहले मानिकपुर के पास कामायनी एक्सप्रेस में लाखों की लूट के साथ ही रूसी महिला की हत्या में भी इसका नाम पहले आया था। उस समय नाबालिग होने का लाभ मिला था और जेल से जमानत पर छूट गया था।
यहां तक कि आरोप लगे कि यह कुख्यात डाकू ददुआ, रागिया व बलखड़िया गैंग के लिए भी मदद व सामग्री पहुंचाने का काम करता था। स्थानीय लोगों का मानना है कि लूलू चलती ट्रेन में आसानी से दौड़ने में माहिर है। कई बार चलती ट्रेन में बड़ी वारदात कर आसानी से भाग जाता था। दो/तीन सितंबर की रात मुंबई हावड़ा रेलमार्ग के पनहाई स्टेशन के पास एक दर्जन साथियों के साथ लूलू पटेल ने गंगा कावेरी ट्रेन में लाखों की डकैती डाली थी। तब से जीआरपी उसे तलाश कर रही है। इस दौरान कई बार पुलिसिया कार्यशैली पर भी सवाल उठे।
इस घटना के दस दिन बाद ही बांदा पुलिस टीम ने लूलू व उसके दस हजार के इनामी साथी आदित्य को पकड़ लिया था। आईजी रेलवे बीआर मीणा ने भी इसका दावा किया कि बांदा पुलिस ने बदौसा स्टेशन के पास कथित मुठभेड़ दिखाकर इनके भागने की बात कही, जबकि इसके पूर्व ही दोनों पुलिस की गिरफ्त से भाग चुके थे। जिसका खुलासा नवंबर माह में बदमाश आदित्य की गिरफ्तारी के बाद हुआ था। आईजी रेलवे इलाहाबाद ने इसकी पूरी जानकारी डीजीपी कार्यालय को भी दी है। जिस मामले में बांदा के स्वॉट टीम की गहन जांच चल रही है। अब सरगना लूलू के पकड़े जाने के बाद यह तय है कि बड़े बडे़ राज खुलना तय है।