मऊ/राजापुर। यमुना के जलस्तर में बीते 24 घंटे में चार सेंटीमीटर प्रतिघंटे की गति से पानी नीचे जा रहा है। इससे बाढ़ पीड़ितों ने राहत की सांस ली है। लेकिन अब बीमारियों की आशंका से ग्रामीण परेशान हैं। लोगों का कहना है कि बारिश में कोई झांकने नहीं आया बीमारी में कौन पूछेगा। उधर बाढग़्रस्त इलाकों में खाने पीने की वस्तुओं से लेकर पशुओं के चारे का संकट खड़ा हो गया है। जिन किसानों की फसल बाढ़ के कारण खराब हो गई, वह चिंतित हैं। स्कूल भी बंद कर दिए गए हैं।
मऊ में यमुना नदी में बाढ़ से 50 गांव प्रभावित हैं। शनिवार को ताड़ी ग्रामसभा के मजरा मोहड़ा में पानी घुस गया था। ग्रामीणों ने बोरिया बिस्तर बांधना शुरू किया ही था कि रात में पानी घटने लगा। इससे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। मऊ क्षेत्र के मवई कला, बरहा कोटररखंभा, घुरेटहा, बरवार, मंडौर, गांवों में सहित अन्य गांव बाढ़ से प्रभावित हैं।
प्राथमिक विद्यालय सेषासुबकरा में बाढ़ का पानी आने से स्कूल को बंद कर दिया गया है। इसी तरह सेे राजापुर क्षेत्र के अतरौली, नैनी, धौरहार, बरद्वारा, चांदी धुमाई, बक्टा, हस्ता, बेलास, चिल्लीमल आदि गांव के निवासी बाढ़ के कारण समस्याओं से जूझ रहे है। राजापुर के करीब पचास परिवारों को विद्यालय में बनाए गए राहत कैंप में ठहराया गया है। प्रशासन ने इनके खाने पीने की व्यवस्था कराई है। संपर्क मार्गों पर अभी भी पानी भरा हुआ है। हालांकि धीरे-धीरे कम हो रहा है।
पशुओं के लिए चारे की समस्या सबसे अधिक
मऊ/राजापुर। बाढ़ से पशुओं के लिए चारे की समस्या खड़ी हो गई है। बाढ़ क्षेत्र में जिन ग्रामीण ने भूसे की व्यवस्था की थी, वह खराब हो गया है। मवई गांव के कमलेश प्रसाद व राजापुर क्षेत्र के चदहा ठाकुर ने बताया कि घर में रखा भूसा पूरी तरह से खराब हो गया है। अब पशुओं के लिए भूसा कहां से मिलेगा। इसके लिए चिंता सता रही।
अंधेरे में रहने को मजबूर
मऊ। बिजली की आपूर्ति बाढ़ प्रभावित गांवों न होने से अंधेरे में रहने को मजबूर है। बिजली के उपकरण बाढ़ में डूब जाने से खराब हो गए है। कई स्थानों पर तार टूटे पड़े हैं। मऊ क्षेत्र के चकौर गांव के सुनील तिवारी, राजू सिंह, मवई कला गांव के इंद्रेश त्रिपाठी ने बताया कि सबसे ज्यादा बिजली की समस्या है। बिजली न रहने से घर में रहना मुश्किल है। अभी उम्मीद भी नहीं है कि जल्द बिजली की आपूर्ति शुरू हो पाएगी।
फसलों को हुआ नुकसान
मऊ/राजापुर। अन्ना मवेशियों को चलते गांवों में तिलहनी फसल की बोआई की गई थी, जो बाड़ के चलते बर्बाद हो गई। बरहा कोटरा गांव के छोटू त्रिपाठी, ताड़ी गांव के बृजेश यादव, मंडौर गांव के रमेश तिवारी का कहना है कि नदी किनारे बसे गांवों की 80 प्रतिशत फसलें चौपट हो गई हैं।
यमुना का जलस्तर कम हो रहा है। बाढ़ प्रभावित परिवारों को सरधुआ के स्कूल में ठहरने की व्यवस्था कर दी गई है। इसके अलावा कहीं से समस्या की सूचना नहीं मिली है। अभी कहीं बीमारी फैलने की भी सूचना नहीं है। फिर भी स्वास्थ्य विभाग की टीम को अलर्ट कर दिया गया है। -प्रमोद झा, एसडीएम राजापुर।