चित्रकूट। दस साल पूर्व हुई हत्या के मामले में जनपद न्यायाधीश विष्णु कुमार शर्मा ने चार अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 13-13 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। सजा पाने वालों में दो सगे भाई हैं।
शनिवार को जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी श्यामसुंदर मिश्रा ने बताया कि सदर कोतवाली क्षेत्र के हिनौता गांव निवासी शिवदयाल रैकवार ने कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 25 अक्तूबर 2012 को वह बेटे संतोष कुमार व गांव के तमाम लोगों के साथ दुर्गा मूर्ति का विसर्जन करने पयस्वनी नदी गया था। बैंडबाजे के साथ लड़के नाच गा रहे थे।
इस दौरान उनके गांव का निवासी दादू सिंह गांव के कुछ लोगों से झगड़ा करने लगा। इसके बाद समझा बुझाकर मूर्ति विसर्जन के बाद वे लोग घर आ गए। इसके बाद इसी दिन शाम छह बजे योजना बनाकर दादू सिंह अपने भाई सोल्ही उर्फ वीरेंद्र व गांव के ही मनोज सिंह और गोपाल दास उर्फ रामबाबू सिंह के साथ लाठियां लेकर उसके दरवाजे पर आ गए और गालीगलौज करने लगे।
वादी के पुत्र के साथ मौजूद गांव के चौकीदार व उसकी पत्नी को हमलावर लाठियों से मारने लगे। शोरगुल सुनकर गांव के लोग आ गए। इस पर चारों हमलावर संतोष कुमार को मरा समझकर शेष लोगों को जान से मारने की धमकी देते हुए भाग गए। वादी अपने पुत्र संतोष, चौकीदार रामखेलावन व उसकी पत्नी राजरानी को जिला अस्पताल लाया। संतोष को डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया।
पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज करने के बाद आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था। बचाव और अभियोजन पक्ष के अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद जनपद न्यायाधीश विष्णु कुमार शर्मा ने दोषसिद्ध होने पर चारों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। प्रत्येक अभियुक्त को 13 हजार रुपये अर्थदंड से भी दंडित किया गया। अर्थदंड की आधी धनराशि मृतक के वारिस को देने के भी आदेश हुए।