चित्रकूट। सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव करीब आठ बार धार्मिक नगरी आए थे। वे भगवान राम की कर्मभूमि और गोस्वामी तुलसीदास की जन्मस्थली के विकास के अगुवा रहे। चित्रकूट शब्द को वह धार्मिक मानते थे। चित्रकूट का नाम बदलने पर उन्होंने दिल्ली से बंगाल तक विरोध किया था।
मुलायम सिंह यादव ने यूपी के चार जिलों को चित्रकूट से जोड़ने के लिए राजापुर में यमुना नदी पर ऐतिहासिक पुल बनवाया था। इस पुल से प्रयागराज, फतेहपुर, कौशांबी और प्रतापगढ़ के लाखों लोग हर दिन चित्रकूट व मप्र के सतना जबलपुर जिले की ओर आते जाते हैं। इससे क्षेत्रीय लोगों की आर्थिक स्थिति भी सुधरी। धर्मनगरी को अयोध्या, प्रयागराज, दिल्ली, मथुरा और लखनऊ से जोड़ने के लिए उन्होंने ही हवाई पट्टी का निर्माण शुरू कराया था।
वर्ष 1997 में बसपा मुखिया मायावती ने चित्रकूट को जिला बनाकर इसका नाम शाहूजी महराज रखा तो मुलायम सिंह ने इसकी खिलाफत की। उन्होंने जिला बनाने का स्वागत किया, लेकिन चित्रकूट का नाम बदलने का विरोध किया।
उन्होंने चित्रकूट से लेकर दिल्ली, लखनऊ और बंगाल की रैलियों में इसका जिक्र किया। उन्होंने कहा था कि चित्रकूट के नाम से ही जिला बने और वह मंडल भी बनवाएंगे। इसके बाद भाजपा की सरकार बनी तो पूर्व सीएम कल्याण सिंह ने इसका नाम बदलकर चित्रकूट और इसी नाम से मंडल बनाने की घोषणा की थी।
सपा जिलाध्यक्ष अनुज यादव ने बताया कि उनके पिता पूर्व सपा जिलाध्यक्ष राजबहादुर सिंह के निधन पर सपा मुखिया के कहने पर ही पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आए थे। उनके आवास के सामने हेलीकाप्टर से उतरकर मिलने आए थे। मुलायम सिंह यादव सपा कार्यकर्ताओं पर जान छिड़कते थे।