फोटो- 2- जिला अस्पताल के इमर्जेंसी वार्ड में भर्ती मरीज यहां नहीं दिखता आग बुझाने वाला यंत्र। संवा?
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चित्रकूट। अस्पतालों में अग्निकांड होने के बाद अधिकारी चेत नहीं रहे हैं। अस्पतालों व नर्सिंग होम में आग की घटनाओं से बचने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। सरकारी अस्पतालों ने अग्निशमन विभाग से एनओसी भी नहीं लिया है। अस्पतालों में फायर ब्रिगेड के लिए पानी भंडारण की टंकी तो बनाई गई है, लेकिन इसमें पानी भरने की कोई व्यवस्था नहीं है। जिला अस्पताल में तो सिर्फ आग बुझाने वाले छोटे सिलिंडर ही हैं।
जबलपुर शहर के एक निजी अस्पताल में आग लगने से आठ की मौत हो गई थी। इस घटना में चित्रकूट जिले के मानिकपुर थाना गुरौली निवासी चाची व भतीजे की भी जान चली गई थी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शिवरामपुर में जुलाई माह में आग लगी थी। उसके बाद भी व्यवस्था नहीं सही की गई। एक साल पहले अस्पताल मेें निर्माणदायी संस्था ने फायर ब्रिगेड के लिए पानी भंडारण की टंकी रखी, अलार्म लगाया, लेकिन पानी भरने के इंतजाम नहीं हैं। न ही अलार्म बजता है। अग्निशमन यंत्र जरूर 12 हैं।
जिला अस्पताल में फायर ब्रिगेड के लिए पानी के भंडारण के लिए बना ओवर हेड टैंक शोपीश बना है। उसमें कई माह से पानी नहीं भरा गया। टैंक मेें लीकेज है। अग्निशमन यंत्र इमरजेंसी से लेकर वार्ड तक में नहीं दिखाई दिए। सिर्फ बच्चों के वार्ड व ऑपरेशन थिएटर में छोटे सिलिंडर हैं।
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अस्पतालों में फायर ब्रिगेड के लिए पानी भंडारण का इंतजाम नहीं है। सिर्फ छोटे अग्निशमन यंत्र हैं। पानी के लिए कई बार शासन को पत्र लिखा गया है। - डॉ. भूपेश द्विवेदी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
बड़े अग्निशमन यंत्र के लिए मशीन लगाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। जल्द इसका इंतजाम होगा। फिलहाल समय समय पर जनरेटर रूम व इनवर्टर कक्षों का निरीक्षण किया जाता है। - डॉ. सुधीर कुमार शर्मा, सीएमएस
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बड़ी आग के लिए पानी बहुत जरूरी है। सिलिंडर से सिर्फ शुरूआती आग पर काबू पाया जा सकता है। यहां के अस्पतालों की स्थिति काफी दयनीय है। किसी भी सरकारी अस्पताल ने एनओसी नहीं ली है। यतींद्रनाथ उमराव, अग्निशमन अधिकारी