चित्रकूट। शंकर बाजार से 14 अगस्त की दोपहर को सर्राफा व्यवसायी के मासूम पुत्र के अपहरण में बच्चे को ले जाने वाले बाइक सवारों में बताया जाता है कि एक कुछ मोटा तो एक दुबला था। रमपुरिया मोड़ पर पान का डिब्बा रखे एक युवक ने बताया कि इन दोनों ने अपने बीच में एक बच्चे को बैठाया हुआ था। उसके पान के डिब्बे के पास इस गुमसुम बच्चे का इन युवकों ने हाथ-मुंह धोया और पानी पिया। बच्चे की शिनाख्त और उसके हुलिए से जो बात निकलती है, उससे साफ है कि बच्चा अन्ना ही था। उसे राजापुर की ओर जाते भी देखा गया और तफ्तीश के दौरान यह बात भी पता चली कि इन बाइक सवारों को बेराउर के पास किसान ने भी देखा था। पुलिस भी इस दिशा में तफ्तीश कर रही है कि आखिर ये बाइकसवार कौन थे। मासूम के घर में मातम पसरा है। कहीं से भी कोई फोन आता है, मोबाइल बजता है तो सभी की निगाहें उसी ओर क्रेंदित हो जाती हैं कि शायद अन्ना की कोई सूचना मिले, कोई सुराग मिले। अन्ना के दादा सुरेंद्र ने कहा, ज्यों ज्यों समय बीत रहा है, चिंता बढ़ रही है। दो दिन से हम जहां के तहां हैं। समय में नहीं आता कहां जाएं। उन्होंने बताया कि हमारी किसी से कोई दुश्मनी नहीं है और पेशेगत प्रतिद्वंद्विता भी इतनी नहीं कि कोई इतनी बड़ी वारदात कर जाए। अपहरण भी हुआ होता तो अभी तक कोई फोन, कोई कागज तो आ जाना चाहिए था। अन्ना बहुत चंचल और मिलनसार बच्चा है। उसके अपहरण से मुहल्ले में सन्नाटा है। बुधवार से ही मुहल्ले के तमाम दुकानदार दुकानें बंद कर उसकी तलाश में जुटे हैं।