चित्रकूट। नाबालिग को घर से बरगला कर भगा ले जाने और दुराचार करने के मामले में दोष सिद्ध होने पर न्यायालय ने दोषी को 20 वर्ष कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 10 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है।
गुरुवार को विशेष लोक अभियोजक तेज प्रताप सिंह ने बताया कि बरगढ़ थाने में एक व्यक्ति ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह 19 जून 2017 को सबेरे बरगढ़ बाजार के पश्चिम वाले घर में अपनी पत्नी के साथ गया था। वहां से एक घंटे बाद लौटा तो उनकी नाबालिग पुत्री घर में नहीं मिली।
अंदर देखा तो पत्नी के गहने भी गायब थे। शिकायतकर्ता ने बताया कि आरोपी द्वारा हमेशा उसके घर पर नजर रखी जाती थी और पूर्व में भी आरोपी उसकी बेटी को बरगला कर ले गए थे। जिसकी एफआईआर कराई थी। पूर्व में 25 मई 2017 की घटना में एफआईआर दर्ज होने के बाद बयान भी हो चुके थे। जिसमें आरोपी द्वारा स्वयं को बचाने के लिए दोबारा उसकी लड़की को बहला फुसला कर भगा ले जाया गया है।
पुलिस ने मामले में शिकायतकर्ता की तहरीर के आधार पर गोईया कला निवासी मोहित उर्फ प्रधान के विरूद्ध अभियोग पंजीकृत किया था। साथ ही आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद पीडि़ता का चिकित्सीय परीक्षण कराया गया था। पीड़िता के बयान के आधार पर पुलिस ने न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था। बचाव और अभियोजन पक्ष के अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश विनीत नारायण पांडेय ने निर्णय सुनाया। इसमें दोषी मोहित उर्फ प्रधान को 20 वर्ष कठोर कारावास की सजा सुनाई है।