पीडीडीयू नगर। कोरोना महामारी की वजह से महाराष्ट्र में मिनी लॉकडाउन लगा दिया गया। वहीं अन्य राज्यों में भी कुछ न कुछ प्रतिबंध जारी है। इसका असर यह हो रहा है कि वहां कमाने गए प्रवासी श्रमिक एक बार फिर ट्रेनों में सवार होकर घर वापस लौट रहे हैं। ऐसे में डाउन की ट्रेने पूरी तरह फूल नजर आ रही हैं। ट्रेनों में सवार श्रमिकों के चेहरे पर वापसी का दर्द साफ झलक रहा है। मजदूरों का कहना है कि यदि अचानक लॉकडाउन हो गया तो देश में कोरोना संक्रमण ने सभी रिकार्ड ध्वस्त कर दिए हैं। इसकी वजह से कहीं नाइट कर्फ्यू तो कहीं वीकेंड कर्फ्यू जारी है। वहीं महाराष्ट्र मे मिनी लॉकडाउन लगा दिया गया है। देश के अन्य हिस्सों में लॉकडाउन की आशंका गहराती जा रही है। इसको देखते हुए महानगरों में कमाने गए श्रमिक किसी तरह भाग कर घर वापस लौट रहे हैं। मुंबई स्पेशल से गया वापस लौट रहे मनोज कुमार ने बताया कि महानगर ने एक बार फिर धोखा दे दिया। पिछले वर्ष लॉकडाउन के दो दिन पहले वापस आया था। ट्रेन शुरू होने पर फैक्टरी के मैनेजर ने फोन कर बुलाया था। वहां गया काम शुरू किया लेकिन कोरोना के केस बढ़ने के बाद कह दिया गया कि काम नहीं है वापस जाइए। वहां बैठकर क्या करता, वापस आ गया। इसी तरह दिल्ली के अशोक विहार में रहकर दंतमंजन की फैक्टरी में काम करने वाले राजेन्द्र ने बताया कि रोज कोरोना संक्रमित मिल रहे हैं। ऐसे में कब पूर्ण लॉकडाउन हो जाएगा, कहा नहीं जा सकता। फैक्टरी में भी पचास प्रतिशत लोगों को हटा दिया गया है। ऐसे में परिवार के साथ भागने में ही भलाई समझी। कोरोना समाप्ति के बाद जाउंगा तब तक गांव में रहकर काम करूंगा। पटना निवासी शुभम ने बताया कि वह दिल्ली में रेडिमेड गारमेंट की दुकान पर काम करता है। कोरोना शुरू होते ही सरकार ने नाइट कर्फ्यू लगाया तो मालिक ने हमारे पैसे कम कर दिए। पिछले लॉकडाउन में मैं किसी तरह दिल्ली में ही रह गया था लेकिन प्रवासी श्रमिकों को पैदल चलते देखता था। इस बार पैसे नहीं है और यदि लॉकडाउन होता है तो पैदल नहीं चलना चाहता। इसलिए वापस लौट आया।