मुगलसराय कोतवाली के रौना गांव में रविवार की सुबह चार बहने जान देने की नीयत से गंगा तट पर पहुंचीं। उन्हें नदी में कूदने ही जा रही थीं कि ग्रामीणों को शक हो गया। लोगों ने उनसे पूछताछ की तो पता चला कि शनिवार की रात किसी बात पर पिता ने उन्हें डांट दिया। इससे क्षुब्ध होकर चारों बहनें यहां आत्महत्या करने पहुंची थीं। लोगों ने पुलिस को बुलाकर किशोरियों को परिवार वालों के हवाले कर दिया। मिर्जापुर जिले के रहने वाला व्यक्ति चंदौली के एक ईंट भट्ठे पर काम करता है। उसके साथ ही उसकी पत्नी और चार बेटियां रहती हैं। आर्थिक तंगी के कारण आए दिन घर में विवाद होता रहता था। शनिवार की रात भी किसी बात को लेकर विवाद हो गया। पिता ने अपनी बेटियों को डांट दिया। इससे क्षुब्ध होकर चारों किशोरियां रविवार की भोर में चारों गंगा किनारे पहुंच गईं।
सुबह मुगलसराय कोतवाली क्षेत्र के रौना गांव के निवासी गंगा किनारे टहल रहे थे। ग्रामीणों की नजर किशोरियों पर पड़ी। चारों एक-दूसरे हाथ पकड़े गंगा किनारे खड़ी थीं। उनको इस स्थिति में देखकर ग्रामीणों ने पूछताछ शुरू कर दी। पहले वे इधर-उधर की बातें करती रहीं। जब जोर देकर उनसे पूछ गया तो एक लड़की ने बताया चारों गंगा में कूदने आई हैं। इसके बाद ग्रामीणा किशोरियों को वहां हटाकर गांव लेकर आये और इसकी सूचना पुलिस को दी।
पुलिस ने किशोरियों के पिता को इसकी सूचना देने की कोशिश की लेकिन उनका फोन नहीं उठा। बाद में उन्होंने भट्टे के मुंशी को मौके पर बुलाया। यहां पहुंचे भट्ठे के मुंशी ने किशोरियों की पहचान भट्ठे पर कार्यरत एक मजदूर की पुत्रियों के रूप में की। इसके बाद किशोरियों की काउंसिलिंग करने के बाद पुलिस ने मुंशी को सौंप दिया। मुगलसराय कोतवाली प्रभारी निरीक्षक दीनदयाल पांडेय ने बताया कि चार लड़कियां भटकते हुए गंगा किनारे पहुंच गई थीं। उन्हें परिवार वालों के सुपुर्द कर दिया गया है।