शुक्रवार को बबुरी उपकेंद्र के बाहर धरने पर बैठे ग्रामीण। संवाद
बबुरी। भीषण उमस, अघोषित बिजली कटौती और रातभर अंधेरे में रहने से परेशान बबुरी क्षेत्र के लोगों का गुस्सा आखिरकार बृहस्पतिवार को फूट पड़ा।
बृहस्पतिवार को दिनभर भीषण उमस के बाद रात 10:20 बजे जैसे ही क्षेत्र की बिजली गुल हुई, पहले से आक्रोशित बबुरी, दुदे, लेवा, जरखोर, दिधवट, गौरी, दवक सहित 20 गांवों के 120 से ज्यादा लोग बबुरी बिजली उपकेंद्र पहुंच गए। मुख्य गेट पर ताला जड़कर धरने पर बैठ गए। धरना शुक्रवार की दोपहर दो बजे तक चला। मामला तब शांत हुआ जब अधीक्षण अभियंता जसवीर सिंह ने लिखित आश्वासन दिया। बबुरी उपकेंद्र से छह फीडर जुड़े हैं। यहां से 89 गांवों की बिजली आपूर्ति होती है। ग्रामीणों का आरोप है कि बीते एक महीने से रात 10 बजे के बाद नियमित रूप से छह से सात घंटे तक बिजली काटी जा रही है। दिन में लो वोल्टेज और रात में अंधाधुंध कटौती ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। धान रोपाई के पीक सीजन में ट्यूबवेल बंद पड़े हैं। पेयजल संकट गहराने लगा है। कई गांवों के लोगों ने आरोप लगाया कि शिकायत करने के बावजूद अधिकारी सिर्फ आश्वासन देते रहे, इससे नाराज होकर उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। आधी रात को भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष राणा प्रताप सिंह मौके पर पहुंचे। अधिशासी अभियंता से फोन पर बात करके समाधान निकालने की कोशिश की, लेकिन अधिकारियों ने ऊपर से लोड शेडिंग के आदेश होने की बात कही। सुबह 10:30 बजे एसडीओ अमर सिंह पटेल धरनास्थल पर पहुंचे। कहा कि ऊपर से ही कटौती के निर्देश है। मांग ज्यादा होने के कारण लोकल स्तर पर कुछ नहीं किया जा सकता। इस पर ग्रामीण भड़क गए। ग्रामीण श्रीप्रकाश, पप्पू सेठ सहित अन्य लोगों ने कहा कि हर बार यही बहाना बनाया जाता है। जबकि अपोलो फैक्ट्री को पूरी रात बिजली मिल रही है तो हमें क्यों नहीं।