बिजलीकर्मियों की हड़ताल रविवार की शाम खत्म होने पर जहां लोगों ने राहत की सांस ली तो वहीं इससे पैदा हुई दुश्वारियां जारी रहीं। जिले के 300 से ज्यादा गांवों में देर शाम तक आपूर्ति बहाल नहीं होने से लोगों में नाराजगी रही। हड़ताल समाप्त होने के बाद भी विभाग के अधिकारियों के मोबाइल बंद रहे जिससे चाह कर भी समस्याओं के बारे में जानकारी नहीं दी जा सकी। 72 घंटे हड़ताल के चलते उपकेंद्रों से आपूर्ति ठप कर देने से आम लोगों को 48 से 50 घंटे बिजली की सेवा नहीं मिल सकी। लोगों ने कहा कि हड़ताल पर जाना कर्मियों का संवैधानिक अधिकार है लेकिन आम जनता को परेशान करने की नियत से आपूर्ति ठप करना संवैधानिक नहीं कहा जा सकता। प्रशासन की आधी-अधूरी तैयारी का भी खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ा। स्थिति यह थी कि बंद फीडरों को चालू करने में रिजर्व कर्मचारियों को घंटों लग रहे थे। वहीं फीडर के चालू होने के बाद गड़बड़ी आ जाने पर उसे दूर करने में भी मशक्कत करनी पड़ रही थी। बिलारीडीह स्थित उपकेंद्र पर तो हड़ताल के कारण निलंबित कर्मचारी को बुलाकर आपूर्ति बहाल करानी पड़ी। चंदासी उपकेंद्र से जुड़े चार फीडरों की बिजली पिछले 25 घंटों से गायब है। इससे लोगों को रविवार को पानी के लिए खासा परेशान होना पड़ा। कई स्थानों पर लोग घरों के बाहर किराए का जनरेटर लगवाकर बिजली की कमी दूर करते रहे। चंदासी में बिजली शनिवार की दोपहर पौने तीन बजे चली गई। इसके बाद लोग इंतजार करते रहे लेकिन बिजली नहीं आई। जानकारी के लिए विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों को फोन मिलाया गया तो सभी के मोबाइल बंद मिले। ऐसे में लोग उपकेंद्र पर जुटने लगे। सूचना मिली तो एसडीएम अविनाश कुमार, भाजपा नेता चंद्रकांत तिवारी वहां पहुंचे और उन्होंने लोगों को समझाकर सीमित कर्मचारियों से आपूर्ति बहाल कराने का प्रयास कराया लेकिन केवल दो फीडर की आपूर्ति ही बहाल हो सकी। रविवार को भी लोग बिजली का इंतजार करते रहे लेकिन देर शाम तक बिजली नहीं आई।