बंद पड़ी बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा।
अखिल भारतीय बैंक अधिकारी परिसंघ, युनाइटेड फोरम व बैंक के अन्य संघटनों के आह्वान पर एक दिवसीय हड़ताल के कारण मंगलवार को मुख्यालय सहित जनपद के विभिन्न क्षेत्र के कुल 135 बैंक शाखाओं में ताला लगा रहा। इसके चलते लगभग दो सौ करोड़ का व्यवसाय जहां प्रभावित हुआ। वहीं 75 करोड़ की क्लीयरिंग भी फंसी रही। खाताधारकों, व्यवसायियों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। साथ ही धन निकालने के लिए एटीएम केंद्रों पर लाइन लगानी पड़ी। इस दौरान बैंक आफ बड़ौदा के अधिकारी व यूनियन के जनरल सेक्रेटरी पीके घोष ने कहा बैंकिंग नीति श्रम विरोधी है, उसे समाप्त किया जाए। श्रम अधिकार कानून बनने और आउट सोर्सिंग बंद हो। जबकि उनकी मांगें हैं विनियमितीकरण के तहत अधिकारियों को उचित क्षतिपूर्ति दी जाए। कर्मचारी व अधिकारियों का पीएल डेबिट करने के बजाए सरकार उसे खुद वहन करे। ग्रेज्युटी 20 लाख है, इसे बढ़ाया जाए। अनुकंपा के आधार पर बैंकों में 2014 में नौकरी देने की प्रक्रिया शुरू हुई, पर अधिकांश बैंक इसका लाभ नहीं दे रहे हैं। यह नियुक्ति प्रक्रिया सभी बैंकों को करनी चाहिए। कहा विभिन्न पदों पर बैंक नियुक्ति नही कर रहे हैं, ये प्रतिबंध हटाया जाए और सभी पदों पर नियुक्ति की जाए। बैंकों का कार्य पांच हफ्ते से हटाकर उसे चार हफ्ता का किया जाए। कहा हम बैंक अधिकारियों और कर्मचारी की मांगों पर अगर तत्काल विचार नहीं किया गया तो हम सब आंदोलन करेंगे, इसके लिए सरकार जिम्मेदार होगी। बैंकों के बंद रहने से गांव-गिरांव के खाताधारक बैंकों तक आए लेकिन ताला लटकने और गेट पर हड़ताल का बोर्ड देखकर लौट गए। हालांकि बैंकों के एटीएम के खुलने से लोगों को मामूली राहत जरूर मिली।