पड़ाव के बहादुरपुर में प्लास्टिक की झोपड़ी में रहने को विवश शामली। संवाद
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पीडीडीयू नगर/पड़ाव। खुले आसामान के नीचे या फिर झोपड़ी में गुजारा कर रहे गरीबों को छत देने की मंशा से सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना चलाई है। लेकिन स्थानीय जनप्रतिनिधिओं और अधिकारियों की लापरवाही से योजना का लाभ कुछ गरीबों को अब तक नहीं मिल पाया है। पड़ाव क्षेत्र के बहादुरपुर गांव की शामली देवी को 2018 में जिलाधिकारी और 2021 में भाजपा जिलाध्यक्ष ने एक महीने के अंदर आवास दिलाने का वादा किया था। आज तीन साल हो गए पर वृद्धा को आवास नहीं मिल पाया है। वह आज भी बाढ़ से गिर चुके मिट्टी के घर में प्लास्टिक से आड़ कर अपने परिवार के साथ गुजारा कर रही है। सैयदराजा, पीडीडीयू नगर समेत कई जगहों पर पक्के मकान वालों को पैसे और पैरवी के बल पर आवास मिल गए पर जिसको रहने के लिए घर नहीं है वह आज भी आस लगाए बैठा है। पड़ाव क्षेत्र के शामली देवी के पति किशुन की मृत्यु हो चुकी है। 2018 में आई बाढ़ से उनका मिट्टी का घर गिर चुका है। उस समय निरीक्षण के लिए आए जिलाधिकारी नवनीत सिंह चहल ने भावावेश में एक महीने के अंदर आवास दिलाने का वादा कर दिया। शामली को भरोसा हो गया कि जब डीएम ने कहा है तो घर बनाने के लिए पैसा मिलेगा पर आज तीन साल हो गए हैं। अब तक पैसा तो दूर कोई अधिकारी झांकने और हाल तक पूछने नहीं आया है। वहीं 2021 में बाढ़ का सर्वे करने भाजपा जिलाध्यक्ष अभिमन्यु सिंह भी पहुंते तो देखा कि वृद्धा के घर में पानी भरा है। उन्होंने सांसद से बात कर आवास दिलाने का वादा किया पर आज तक कुछ नहीं हुआ। आलम यह है कि शामली अपने दो बेटों, बहु और बच्चों के साथ बाढ़ में गिर चुके मिट्टी के घर को प्लास्टिक से आड़ कर गुजारा कर रही हैं। स्थानीय निवासी आलोक सिंह निषाद ने बताया कि शामली देवी ने कई बार अधिकारियों के यहां जाकर भी गुहार लगाया। मैने दर्जनों बार मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, स्थानीय नेताओं और जिलाधिकारी को ट्वीट के माध्यम से शिकायत की पर किसी ने इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया। एसडीएम पीडीडीयूनगर गुलाब राम ने बताया कि जब जिलाधिकारी ने आश्वासन दिया था तो जरूर कार्रवाई हुई होगी। अभी तक आवास क्यों नहीं मिल पाया इसकी जांच कराकर देखा जाएगा कि कहां दिक्क्त हो रही है। अगर पात्र हैं तो जरूर आवास मिलेगा।