पीडीडीयू नगर/धानापुर। देश की आजादी की लड़ाई में जिले के जाबांज भी पीछे नहीं रहे। अपनी जान की बाजी लगाकर देश को आजाद कराया। नौ अगस्त 1942 को अगस्त क्रांति का बिगुल फ़ूंकने के बाद 16 अगस्त 1942 को धानापुर के तीन रणबांकुरे शहीद महंगू सिंह, हीरा सिंह और रघुनाथ सिंह धानापुर थाने पर झंडा फहराते समय पुलिस की गोली से शहीद हो गए। वहीं शिवमंगल यादव और हरिनारायण अग्रहरि ने गोली चला रहे थाने के दरोगा को मौके पर ही मौत के घाट उतार दिया था। देश की आजादी में धानापुर के जाबांजों की बड़ी भूमिका थी। रणबांकुरों ने न सिर्फ थाने पर झंडा फहराया बल्कि जान की बाजी लगाकर देश को आजाद कराने में अपनी महती भूमिका निभाई। अगस्त क्रांति के बाद रणनीति के तहत क्षेत्र के युवा 16 अगस्त को धानापुर थाने पर तिरंगा फहराने का निर्णय लिया था। इसके बीच जब झंडा फहराने पहुंचे तो वहां पुलिस से झड़प हो गई। तभी थानेदार अनवारूल हक ने गोली चला दी और घटना में महंगू सिंह, हीरा सिंह और रघुनाथ सिंह शहीद हो गए। इस दौरान कामता प्रसाद विद्यार्थी ने थाने पर जाकर तिरंगा फहरा दिया। अगस्त क्रांति में शामिल शिवमंगल यादव और हरिनारायण अग्रहरि ने जब देखा की पुलिस गोली चला रही है और उनके तीन साथी शहीद हो गए तभी हरिनारायण अग्रहरि थाने के दरोगा को पकड़कर झूल गए और शिवमंगल यादव ने लाठी से प्रहार कर दरोगा को मौत के घाट उतार दिए। आज भी धानापुर थाने में बनी तीनों शहीदों की मूर्ति आजादी के दिनों की याद दिलाती है। स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के अवसर पर लोग वहां जुटते हैं और अपने बहादुर जवानों की याद में शीश झुकाकर उन्हें नमन करते हैं।