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लंपी से तीन गायों की मौत, 24 से ज्यादा बीमार, पशुपालकों में दहशत

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धीना। क्षेत्र में लंपी बीमारी तेजी से पांव पसारने लगा है। एक सप्ताह के अंदर जहां इस बीमारी से तीन गायों की मौत हो चुकी है। वहीं 24 से ज्यादा पशु अभी भी इसके चपेट में हैं। इससे एक दर्जन से ज्यादा गांवों में दहशत है। वहीं पशुपालन विभाग के प्रति पशुपालकों में रोष है। धीना क्षेत्र में ज्यादातर गांव हैं, जहां रहने वाले लगभग सभी किसान पशुपालन से जुड़े हैं। किसी के पास एक, किसी के पास दो तो किसी के पास 20 से ज्यादा पशु हैं। क्षेत्र के पशुपालक इस समय लंपी वायरस को लेकर काफी दहशत में हैं। पशुपालकों का कहना है कि इस बीमारी की चपेट में आते ही पशु चारा-पानी छोड़ दे रहे हैं। इससे वे कमजोर पड़ते जा रहे हैं। जनौली गांव के पशुपति चौबे की एक गाय, राजनारायण विश्वकर्मा की एक गाय और एवती के अशोक सिंह की एक गाय की लंपी की वजह से मौत हो चुकी है। गांव के हृदयनारायण सिंह, ज्ञानप्रकाश सिंह, नंदू यादव, रामाज्ञा सिंह, तिलेश्वर गोंड, दीपक खरवार, मुकेश सिंह सहित अन्य लोगों की गाय भी इस रोग की गिरफ्त में हैं। हृदयनारायण सिंह व तिलेश्वर गोंड़ की गाय की हालत काफी खराब है। ऐसे ही बम्हनियांव व कवई पहाड़पुर में एक दर्जन से अधिक पशु संक्रमण की चपेट में हैं। संक्रमण का असर महुरा, प्रकाशपुर, नौली, एवती, रामरुपदासपुर, बघरी, इनायतपुर, नेगुरा, रनपुर, मधुपुर, जमुर्खा आदि गांवों के पशुओं पर भी दिख रहा है। वहीं बरहनी ब्लॉक के डैना, डिग्घी, बरडीहा, भैंसउर, मुड़कपुवा, गोरखा सहित अन्य गांवों में भी पशु लंपी बीमारी की चपेट में हैं। पशुपालकों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग ने टीकाकरण किया पर उसके बाद भी पशु लंपी के चपेट में आ रहे हैं। समझ नहीं आ रहा कि क्या करें। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. फखरुद्दीन ने बताया कि टीकाकरण के समय गर्भधारण करने वाले पशुओं और पशुओं के छोटे बच्चों को टीका नहीं लगाया गया था। वे ही लंपी बीमारी के चपेट में हैं। एवती गांव के अशोक सिंह की गाय को लंपी हुआ था। उसका हमने लगातार इलाज किया पर बचाया नहीं जा सका। सूचना मिलने के बाद तुरंत ही बीमारी से ग्रसित पशु का इलाज करा दिया जा रहा है।पशुपालकों से अनुरोध है कि लंपी के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत विभाग को सूचना दें, होमियोपैथ या प्राइवेट चिकित्सकों के चक्कर में न फंसें। परेशानी का सबसे बड़ा कारण यही है।
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