जिले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का क्षेत्रीय कार्यालय दो दशक से संचालित है, लेकिन यहां अब तक हवा की गुणवत्ता मापने के लिए एक भी उपकरण उपलब्ध नहीं है। स्थिति यह है कि बोर्ड के अधिकारी और कर्मचारी भी आम नागरिकों की तरह जिले का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) गूगल से पूछते हैं। उपकरणों की अनुपलब्धता के कारण जिले की हवा कितनी शुद्ध है या कितनी जहरीली, इसका कोई वैज्ञानिक आकलन नहीं हो पा रहा है। आजमगढ़ में बड़े औद्योगिक केंद्र भले ही न हों, लेकिन शहर में तेजी से हो रहे विकास कार्यों और भवन निर्माण से हवा में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। जगह-जगह निर्माण सामग्री का धूल, वाहनों का धुआं और अन्य प्रदूषक तत्व वातावरण को दूषित कर रहे हैं। जिले में करीब 650 ईंट भट्ठे संचालित हैं। आशुतोष चौहान, क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी ने बताया कि एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम की स्थापना के लिए शासन को पत्राचार किया गया है, लेकिन अब तक वहां से कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इस समय कर्मचारी गूगल या अन्य ऑनलाइन स्रोतों से ही जिले की एक्यूआई की जानकारी लेते हैं।