सड़कों के गड्ढों ने गांव के पांव थाम लिए हैं। किसी सड़क पर मिट्टी डाल कर छोड़ दी गई है तो किसी पर गिट्टी बिछाकर। जिन पर गिट्टियां डालकर छोड़ दी गईं, उन पर चलना दूभर है। कंदवा के भदखरी संपर्क मार्ग, बरहनी-घोसवा संपर्क मार्ग, बहेरा-ककरैत प्रधामनंत्री सड़क मार्ग, कंदवा-तेल्हरा मार्ग, करौती संपर्क मार्ग, बरहनी महुंजी मार्ग गड्ढा मुक्त नहीं हो पाए हैं। यूपी बिहार को जोड़ने के लिए वर्ष 2012- 13 में ककरैत से बहेरा मोड़ तक प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत छह किलोमीटर सड़क बनाई गई थी। इसकी गिट्टियां उखड़ गईं हैं। जगह-जगह गड्ढे हो गए हैं। इस मार्ग पर आवागमन मुश्किल हो गया है।टांडाकला से मारूफपुर मार्ग पर तो गड्ढे हैं हीं, उससे निकली हुसेपुर गांव की सड़क गड्ढों में तब्दील हो गई है। बलुआ से टांडाकला मार्ग के बीच से मटियरा की सड़क के गड्ढों गिट्टी डालकर छोड़ दिया गया है।
कमालपुर क्षेत्र में गांवों के संपर्क मार्गों की स्थिति दयनीय है। उकनी बीरम राय से होते हुए मुंडेहरा रैपुरा मनियारपुर के बीच के चार किलोमीटर लंबे मार्ग पर इतने गड्ढ़े हैं कि वाहन तो दूर पैदल चलना भी मुश्किल है। रैपुरा निवासी दिनेश कनौजिया ने बताया कि सड़क की मरम्मत के लिए भारतीय किसान यूनियन ने उकनी में क्रमिक धरना दिया। पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों का पुतला फूंका। मगर सड़क नहीं बनी।
पड़ाव क्षेत्र में रामनगर रोड से सेमरा डोमरी जाने वाले मार्ग के दोनों तरफ नाले का निर्माण नहीं होने के कारण घरों और फैक्ट्रियों का गंदा पानी रोड पर बह रहा है और सड़क पर गड्ढे हो गए हैं।
इनसेट
लोग बोले
01. करौती संपर्क मार्ग दो सालों से जर्जर हो चुका है। मार्ग पर बने बड़े -बड़े गड्ढों के चलते वाहन तो दूर पैदल चलना भी दूभर हो गया है।ग्रामीणों के हित में इस मार्ग की मरम्मत तत्काल कराया जाना चाहिए। फिरोज खां
02. यूपी बिहार के सीमा पर स्थित इस गांव का संपर्क मार्ग काफी समय से क्षतिग्रस्त होकर गड्ढों में तब्दील हो गया है।जिस पर चलना जान जोखिम में डालना है। बावजूद विभागीय अधिकारी कान में तेल डालकर सो रहे हैं। अरविंद शर्मा
03. गांव का मुख्य मार्ग पिछले काफी समय से क्षतिग्रस्त है,लेकिन विभागीय अधिकारियों से लेकर क्षेत्रीय विधायक और मंत्री का ध्यान इधर नहीं है। रामप्रवेश यादव
04. शासन प्रशासन से कई बार सड़क के मरम्मत की मांग की गई,लेकिन अभी तक अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगा। इससे लोग जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को विवश हैं। दरोगा राम