क्षेत्र के चिरईगांव स्थित शिव मंदिर परिसर में चल रही सात दिवसीय श्रीराम कथा के अंतिम दिन सोमवार की रात कथावाचक विपिन पाठक ने सीता स्वयंवर, लक्ष्मण-परशुराम संवाद और राम-सीता विवाह की कथा सुनाई। कहा कि विवाह संस्कार गृहस्थ आश्रम का प्रवेश द्वार है। राम-सीता का विवाह विश्व के लिए आदर्श है। इस पद्धति से भटककर पाश्चात्य शैली अपनाने के कारण ही आज समाज में अनाचार, व्यभिचार, बलात्कार जैसी घटनाएं जन्म ले रही हैं। उन्होंने नसीहत देते हुए कहा कि आज सबको फिर से भगवान राम व भगवती सीता के संस्कारिक दांपत्य व मर्यादा का अनुसरण करना चाहिए। इस माैके पर नीलम, वंदना, रेनू, मीरा, आरती, सोनाली, आकांक्षा, कनक, मृत्युंजय नागवंशी, जनार्दन, संजय, उपेंद्र, सतीश, कमलेश, आनंद, जयप्रकाश, रामप्रवेश माैजूद रहे। संवाद