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अधूरे आंकड़ों के सहारे लड़ी जा रही कुपोषण से जंग

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पीडीडीयू नगर। देश के पिछड़े जनपदों में शामिल चंदौली जिले में नीति आयोग के निर्देशानुसार कार्य कराया जाता है। नीति आयोग ने स्वास्थ्य एवं पोषण, शिक्षा, कृषि एवं जल संसाधन, वित्तीय समावेशन एवं कौशल विकास व बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष जोर दिया है। करीब तीन साल से इन सभी क्षेत्रों में विशेष ध्यान भी दिया जा रहा है। इसकी बदौलत कुछ हद तक सुधार भी हुआ है, लेकिन अधूरे आंकड़ों की वजह से पोषण के क्षेत्र में बहुत ज्यादा सुधार होता नहीं दिख रहा। आलम यह है कि आज भी जिले में कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों के आंकड़े में बौनेपन का आंकड़ा शामिल नहीं किया जाता, जबकि नीति आयोग के संकेतकों में एक महत्वपूर्ण बिंदु है। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के सूत्रों की मानें तो अभी तक जिले में कुपोषित व अति कुपोषित बच्चों की पहचान के लिए वजन और उम्र को ही प्रमुख आधार माना गया है। हर महीने इसी आधार पर आंकड़ा तैयार किया जाता है। उसके अनुसार लक्ष्य मानकर आगे सुधार की दिशा में काम कराए जाते हैं। जबकि बौनापन भी कूपोषण की एक श्रेणी होती है। यदि बौनेपन का आंकड़ा भी शामिल किया जाए तो निश्चित रूप से कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों का आंकड़ा बढ़ेगा। तभी ठीक से उनकी देखभाल होगी और इस क्षेत्र में मुकम्मल सुधार होगा।
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