नौगढ़। विकासखंड के आरक्षित वन क्षेत्र सेमरा कुसही में इन दिनों प्रशासन की ओर से तहसील और कार्यालय का निर्माण कराया जा चुका है।जबकि इस मामले में दायर याचिका में पहले ही उच्च न्यायालय की ओर से आदेश दिया जा चुका है कि इस वन भूमि से कब्जा हटाया जाए। बावजूद न्यायालय के आदेश को ताक पर रखकर निर्माण कार्य हो रहा है और स्थानीय वनाधिकारी जान कर अनजान बने हुए हैं। विकासखंड के शमशेरपुर निवासी बलराम सिंह ने 2004 में उच्च न्यायालय में याचिका दायर किया था। जिसमें मुकदमा संख्या 2272/2 बलराम सिंह बनाम उत्तर प्रदेश सरकार में पारित आदेश के अनुसार सेमरा कुसही में आराजी संख्या 151, 155, 223 को आरक्षित वन क्षेत्र बताया गया था। इसके बावजूद अधिकारियों की मिलीभगत के चलते न्यायालय के आदेश को ताक पर रखकर इस भूमि पर तहसील भवन और कार्यालय का निर्माण किया जा रहा है। बरराम सिंह का अरोप है कि नक्शा में जमीन स्पष्ट होने के बाद भी वन क्षेत्राधिकारी द्वारा अनापत्ति पत्र जारी कर दिया गया कि यह भूमि आरक्षित वन सीमा के बाहर है। आलम यह है कि जिस वन विभाग को आरक्षित वन भूमि पर कब्जा हटाने का आदेश दिया गया है वही निर्माण में लगा है। वन संरक्षण अधिनियम 1980 के अंतर्गत सरकार की पूर्व अनुमति के बिना आरक्षित वन में कोई भी पक्का निर्माण नहीं कराया जाएगा। इसके लिए शासनादेश भी जारी किया गया है। ऐेसे में सवाल उठता है कि जब प्रशासन के अधिकारी ही इस कानून को दरकिनार कर दे रहे हैं तो अन्य लोगों की क्या स्थिति होगी।