तरावीह नमाज रमजान में ही होती है। रमजान का चांद नजर आने के बाद रात से ही इसकी शुरूआत हो जाती है और ईद से पहले आखिरी रमजान तक पढ़ी जाती है। कस्बा स्थित जामा मस्जिद में कुरआन तरवीह शुक्रवार को हाफिज सकलैन ने पूरी की। नमाज के बाद हाफिज मुबस्सिर ने अपनी तकरीर में कहा कि रमजान माह में तरावीह में कम से कम एक कुरान सुनी जाती है। यह दो-दो रकात करके पढ़ी जाती है। हर चार रकात के बाद थोड़े वक्फे के लिए रुका जाता है और दुआ मांगी जाती है।
उन्होंने कहा की इस्लाम में बहुत ही सहूलियत है। लोगों ने इसे मुश्किल बना दिया है। मुस्लिम समुदाय के लोगों को इस्लाम के बताए हुए रास्ते पर चलना चाहिए। इस रास्ते में झूठ, जीना, कत्ल का कोई स्थान नही है। अंत में देश में अमन-चैन के लिए लोगों ने एक साथ हाथ उठाकर अल्लाह से दुआ मांगी। इस दौरान हाफिज मकसूद, हाजी वसीम, हाजी शाहनवाज, हाजी इसरार खान, डॉ. सेराज, कादिर खान, हसन खान, इसरार खान, अबुल हसनात, सकील खान, सुहेल खान, मासूम खान, समद खान, अंबार खान आदि रहे।