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जीवन में उतारने से ही कथा होती है सार्थक : सुंदर राज

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कंदवा। कथा की सार्थकता तभी सिद्ध होती है, जब इसे हम अपने जीवन में व्यवहारिक रूप में उतारें। अन्यथा कथा केवल मनोरंजन और कानों के रस तक ही सीमित रह जाएगी। ये बातें चिरईगांव में चल रहे कथा के दौरान सुंदर राज महाराज ने कहीं। कहा कि स्त्री लक्ष्मी स्वरूप होती हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि स्त्री को धैर्यवान और गंभीर होना चाहिए। गृहस्थ जीवन में अपने कुटुंब के सभी व्यक्तियों का ख्याल रखने वाली स्त्री अपने घर को स्वर्ग बना देती है। स्त्री को विषमता समाप्त करने वाली स्त्री बनना चाहिए पूतना जैसी नहीं। जिस घर की स्त्रियां धर्म के अनुसार कार्य करती हैं उस घर से दरिद्रता समाप्त हो जाती है। उस घर के पुरुषों को भी नारी का सम्मान करना चाहिए। जिस घर में स्त्री लक्ष्मी के रूप में आचरण करती हैं वहां पुत्र धर्म के रूप में जन्म लेता है और उस स्त्री का लोक और परलोक दोनों में जय जयकार होती है। इस दौरान उमा पांडेय, मृत्युंजय सिंह, सरोज, अलका सिंह, सोनाली पांडेय, आत्म प्रकाश, रामसेवक सिंह रहे।
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