कंदवा। ठंड के मौसम में वायरल बुखार और इंफेक्शन के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन बड़ी संख्या में लोग डॉक्टर की जगह खुद ही एआई या इंटरनेट के जरिये इलाज ढूंढ रहे हैं। गुड़, हल्दी, लौंग जैसे घरेलू नुस्खों को ही पूरा उपचार मानकर बीमारी को हल्के में ले रहे हैं। नतीजा यह कि हालत बिगड़ने पर अस्पताल पहुंच रहे हैं। हाल के दिनों में अस्पतालों में ऐसे मरीज बढ़े हैं, जो कई दिन तक घर पर ही गुड़-काढ़ा, हल्दी वाला दूध, लौंग-अदरक का उबला पानी, गूगल या एआई पर सुझाए गए उपाय का इस्तेमाल करते रहे, पर जब बुखार उतरने की बजाय बढ़ गया, तब अस्पताल पहुंचे। प्रभारी चिकित्साधिकारी बरहनी डॉ. राजेश कुमार सिंह ने बताया कि हर 50 में से लगभग 10-12 मरीज ऐसे ही आ रहे हैं। उन्होंने पहले खुद से दवा ली, जब बुखार ठीक नहीं हुआ तो अस्पताल आए। चिकित्सकों का कहना है कि ये घरेलू नुस्खे कुछ मामलों में शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा सकते हैं, लेकिन इनकी कोई तय डोज या वैज्ञानिक उपचार पद्धति नहीं होती, इसलिए केवल इन्हें ही इलाज मान लेना गलत है। चिकित्सकों के अनुसार, वायरल, डेंगू, टाइफाइड और फ्लू जैसे संक्रमणों में लक्षण एक जैसे लगते हैं। ऐसे में खुद दवा लेना, गलत एंटीबायोटिक लेना या एआई व इंटरनेट से नुस्खे अपनाना कभी-कभी स्थिति गंभीर कर देता है। चिकित्सकों के अनुसार 48 घंटे से ज्यादा बुखार रहे तो अनिवार्य रूप से जांच कराएं। बिना सलाह एंटीबायोटिक न लें। तेज बुखार, उल्टी, बदन दर्द, प्लेटलेट में गिरावट जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत अस्पताल जाएं। डॉक्टरों का कहना है कि अब कई मरीज तब आ रहे हैं जब वायरल बढ़ चुका होता है। चिकित्सकों का साफ कहना है कि इंटरनेट, गूगल या एआई से सलाह जानकारी देने का माध्यम है, डॉक्टर का विकल्प नहीं।