विधायक के अधिवक्ता संदीप यादव ने बताया कि प्रभुनारायण यादव और उनके भाई अनिल यादव को अदालत ने साक्ष्य के अभाव में कुछ धाराओं में बरी कर दिया, लेकिन दो धाराओं में दोषी पाया। अदालत के फैसले के तुरंत बाद जमानत की अर्जी लगाई गई, जिसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए दोनों को जमानत दे दी।
विधायक प्रभुनारायण यादव ने कहा कि 2015 के एक पुराने मामले में अदालत का फैसला आया है। अदालत के फैसले का सम्मान है, लेकिन सरकार की मंशा पर सवाल है। आज ही अदालत ने आजम खान को उस प्रकरण में बरी किया है, जिसमें उन्हें सजा हुई थी। सजा के बाद आजम खान की सदस्यता भी चली गई थी। इस तरह के हथकंडे अपनाकर और कुचक्र रचकर राज्य सरकार विपक्ष के विधायकों की सदस्यता खत्म करना चाहती है।