पीडीडीयू नगर। हावड़ा दिल्ली रूट पर अति व्यस्त पं दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर रेलवे की गलती का खामियाजा आम यात्री भुगतते हैं। जंक्शन के प्लेटफार्म संख्या पांच और छह की लंबाई कम है। ऐसे में इसके पांच से सात डब्बे प्लेटफार्म तक नहीं पहुंचते हैं। रेलवे स्टेशन के पूर्व लंबा यार्ड हैं। यहां कई बार ट्रेन रूकती है। ऐसे में स्टेशन पर ट्रेन के ख़डी होने के बाद भी पीछे के बोगी में बैठे यात्रियों को लगता है कि ट्रेन यार्ड में ख़डी है। ज़ब ट्रेन आगे के लिए चलती है तब स्टेशन का पता चलता है और वे चेन पुलिंग करते हैं और उतरते हैं। चेन पुलिंग होते ही आरपीएफ पकड़ लेती है और जुर्माना वसूलती है। नार्थईस्ट का प्रवेश द्वार माना जाने वाले पं. दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन से प्रतिदिन 110 से अधिक यात्री ट्रेनें गुजरती है। वहीं प्रतिदिन बीस से 25 हजार यात्री ट्रेनों पर सवार होते हैं और उतरते हैं। वर्तमान में यहां आठ प्लेटफार्म है। यहां प्लेटफार्म संख्या पांच और छह की लंबाई इतनी है कि इस पर सिर्फ 18 कोच ही खड़ी होती है। ऐसे में 24 कोच वाले ट्रेन के छह कोच रेलवे लाइन पर ही खड़ी होती है। अक्सर रात के समय पीछे वाले कोच के यात्रियों को लगता है कि ट्रेन यार्ड में खड़ी है। काफी देर बाद जब निर्धारित ठहराव के बाद खुलती है तब यात्रियों को पता चलता है कि प्लेटफार्म से ट्रेन आगे बढ़ रही है। ऐसे में वे चलती ट्रेन में उतरने की कोशिश करते हैं अथवा चेन पुलिंग कर ट्रेन को रोक देते हैं। इससे अनावश्यक रूप से ट्रेन विलंबित होती है। वहीं अक्सर चेन पुलिंग की शिकायत पर आरपीएफ यात्री को पकड़ती है और चालान करती है। ट्रेन की लंबाई बढाने का मामला पिछले कई वर्षों से लंबित है। इस वर्ष भी बजट में इसके लिए पचास लाख रुपये जारी किए गए हैं।