कंदवा। कुत्तों के अलावा कई अन्य जानवरों के काटने से भी रैबीज होने का खतरा होता है। यह वायरस से फैलने वाला एक बेहद गंभीर रोग है जो मानव के मस्तिष्क को प्रभावित करता है। यह बातें ‘विश्व रैबीज दिवस’ के अवसर पर बुधवार को बरहनी स्थित पीएचसी में आयोजित गोष्ठी के दौरान प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. शैलेंद्र कुमार ने कहीं।
उन्होंने कहा कि रैबीज के किटाणु आमतौर पर संक्रमित कुत्ते, बिल्ली, बंदर आदि जानवरों के काटने से व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। रैबीज का वायरस कई बार पालतू जानवर के चाटने, खून या जानवर के लार से सीधे संपर्क में आने से भी फैल जाता है। कहा कि रैबीज एक जानलेवा रोग है जिसके लक्षण बहुत देर में दिखते हैं। अगर समय रहते इसका इलाज न किया जाए तो यह रोग जानलेवा साबित हो जाता है। बुखार, सिरदर्द, घबराहट या बेचैनी, व्याकुलता, भ्रम की स्थिति, खाना-पीना निगलने में कठिनाई, बहुत अधिक लार निकलना, पानी से डर लगना, नींद न आना व शरीर के किसी एक अंग में पैरालिसिस यानी लकवा मार जाना आदि रैबीज के लक्षण हैं। गोष्ठी में डॉ. गौरव नंदन, स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी सूर्यप्रकाश, डॉ. एसपी त्यागी, तेजप्रताप भारती रहे।