पीडीडीयू नगर। जिले में कई जर्जर बिजली के खंभों से आपूर्ति की जा रही है। इसके बावजूद क्षतिग्रस्त खंभों और तारों को बदलने का कार्य ठप है। ऐसे में हमेशा दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। नगर में राममंदिर से कसाब महाल जाने वाले रजत जयंती मार्ग पर क्षतिग्रस्त होकर टेढ़ा हुआ बिजली का खंभा इसकी नजीर है। यह खंभा कभी भी गिर सकता है। अभी तक विभाग के किसी अधिकारी की नजर इस खंभे पर नहीं पड़ी है। इससे लोगों में रोष है। करीब दो वर्ष पूर्व किसी वाहन के धक्के से रजत जयंती मार्ग पर लगा बिजली का उक्त खंभा बीच से टेढ़ा हो गया है। देखने पर खंभा किसी धनुष का आधा हिस्सा लगता है। लापरवाही की हद तो यह है कि इस खंभे पर खींचे गए बिजली के तारों को हटाया नहीं गया है बल्कि उनसे आपूर्ति जारी है। ऐसे में यदि खंभा गिरा तो बड़ी दुर्घटना से इंकार नहीं किया जा सकता। इस मार्ग से होकर दिन-रात लोगों का आना-जाना लगा रहता है। इस रास्ते से होकर नगर पालिका इंटर कॉलेज में पढ़ने वाले छात्रों व छात्राओं का भी आवागमन होता रहता है। बावजूद इसके खंभे को बदलने के प्रति विभाग लापरवाह बना हुआ है। वहीं कूढ़ेखुर्द गांव में गायत्री इंटर कॉलेज के समीप के पोखरे में लगा बिजली का खंभा भी दुर्घटना को दावत दे रहा है। पोखरे के बीचोंबीच लगाए गए इस खंभे से पूरे गाव में बिजली की आपूर्ति की जाती है। ग्रामीणों ने कई बार विभागीय अधिकारियों से खंभे को अन्यत्र लगवाने की मांग की लेकिन उनकी बात किसी ने नहीं सुनी है। कई बार खंभे पर लगे बिजली के तार टूटकर पोखरे के पानी में गिर जाते हैं जिससे पानी में करेंट प्रवाहित होने लगता है। इससे छात्र-छात्राओं के लिए खतरा बना हुआ है। वहीं टूटे तारों की मरम्मत करने में भी विभागीय कर्मचारियों को काफी समय लग जाता है। एलटी के अलावा नगर में 11 हजार के हाईटेंशन तारों के कई खंभे भी कमजोर होकर एक ओर झुक गए हैं। नई बस्ती में जीटी रोड के किनारे लोगों के घरों के ठीक समीप से गुजरे हाईटेंशन तार का खंभा झुका हुआ है। खंभे का झुकाव घरों की ओर है। कभी भी खंभे के गिरने से बड़ी दुर्घटना हो सकती है। पड़ाव क्षेत्र में रामनगर रोड चौराहे से लेकर कटेसर तक व साहूपुरी रोड के उत्तरी छोर पर लगभग कई खंभे व तार जीर्णशीर्ण अवस्था में पहुंच चुके हैं। इससे आए दिन तारों के टूटने व खंभों के वाहनों के धक्के से क्षतिग्रस्त होने की समस्या खड़ी होती रहती है। कई बार वाहनों के धक्के से खंभे टूटकर गिर भी जाते हैं जिससे कई दिनों तक आपूर्ति ठप हो जाती है। इसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ता है। किसी प्रकार की घटना घटित होने पर मरम्मत के नाम पर घंटों बिजली आपूर्ति ठप हो जाती है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि शिकायत के बाद भी बिजली विभाग के अधिकारियों का ध्यान इस ओर नहीं जा रहा है। अधीक्षण अभियंता अरुण कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि जिले में बिजली के जर्जर खंभों व तारों को बदलने के लिए करीब 10 करोड़ रुपये की कार्ययोजना शासन को भेज दी गई है। कार्ययोजना को स्वीकृति मिलने व धन प्राप्त होने के बाद खंभों व तारों को बदलने का कार्य आरंभ करा दिया जाएगा।