वर्ष 2006 में बौरी में पूर्व सांसद रामकिशुन यादव की पुत्री रीना की शादी समारोह में पहुंचे तत्कालीन ?
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पीडीडीयू नगर./चंदौली। समाजवादी पार्टी के संरक्षक और समाजवादी विचारधारा के पोषक मुलायम सिंह यादव का चंदौली जनपद से विशेष लगाव था। यही कारण है कि सात बार से अधिक बार वे चंदौली में आए। जिले के बौरी गांव से नेताजी का अधिक लगाव था। पार्टी गठन से पहले और रक्षा मंत्री बनने के बाद भी वे जिले में आए और समाजवादी विचारधारा को आगे बढ़ाया। उनकी प्रेरणा से जिले में कई विधायक और सांसद मिले जिससे चंदौली की राजनीतिक माटी और अधिक उर्वर हुई। चंदौली सदर विकास खंड के बिसौरी गांव से राममनोहर लोहिया ने श्रमदान कर गांव के नाम को देश के पटल पर ला दिया। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व रक्षा मंत्री मुलायम सिंह यादव ने भी इस गांव में पहुंचकर समाजवादियों में जोश भरा था। पार्टी गठन से पहले क्रांति दल के रथ को लेकर 1992 में पहुंचे थे। यहां पर उन्होंने समाजवादी नेता अवधेश नारायण सिंह के भाई राजनाथ सिंह से मुलाकात की। वहीं विद्यापीठ के पूर्व अध्यक्ष आनंद प्रकाश रंजन के पिताजी शिवपूजन सिंह से मुलाकात कर समाजवाद को आगे बढ़ाने का न्योता दिया। तीन जनवरी 1997 को बिसौरी गांव पहुंचकर रक्षा मंत्री के तौर पर उन्होंने जेल में साथ में रहे अवधेश नारायण सिंह के मूर्ति का अनावरण किया। बौरी गांव से भी उनका विशेष लगाव रहा। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी गंजी प्रसाद ने विधान सभा चुनाव में वर्ष 1989 निर्दल प्रत्याशी के रूप में जीत कर मुलायम सिंह यादव को समर्थन दिया। इसका निर्वहन मुलायम सिंह ने जीवन भर किया। गंजी प्रसाद के पुत्र पूर्व सांसद रामकिशुन यादव ने बताया कि जब पिताजी बीमार हुए तो उन्हें देखने के लिए मुलायम सिंह उनके घर पहुंच गए। इलाज का पूरा खर्च उन्होंने उठाया। रक्षामंत्री रहते हुए 1997 में और मुख्यमंत्री होने पर एक जून को गंजी प्रसाद की पुण्यतिथि पर भी घर भी पहुंचे थे। रामकिशुन ने कहा कि मेरे बेटी की शादी में वर्ष 2006 में भी नेताजी पहुंचे और वर वधु को आशीर्वाद दिया। नेताजी ने लगातार मुझे टिकट दिया और तीन बार विधायक और सांसद बनाया। राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटने के बाद भी गंजी प्रसाद के दूसरे बेटे पूर्व प्रमुख बाबूलाल यादव को दो बार टिकट देकर चुनाव लड़ा। जिला पंचायत सदस्य रमेश यादव ने कहा कि नेताजी हमेशा कार्यकर्ताओं का सम्मान करते रहे। उनके निधन से समाजवादी मार्माहत हैं। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व रक्षा मंत्री मुलायम सिंह यादव न सिर्फ मंझे हुए राजनेता थे बल्कि वे लोगों के दिल में बसते थे। अपने जानने वालों के हर सुख-दुख में शामिल होते रहे, चाहे वे किसी भी पद पर रहे हों। नगर निवासी और लोकतंत्र रक्षक हरबंश सिंह ने कहा कि मुलायम सिंह यादव ने जमीनी स्तर के नेता था। इसका उदाहरण लोकतंत्र रक्षकों को सेनानी का दर्जा देने और पेंशन चालू करना है। मुलायम सिंह यादव ने अपने कार्यकाल में लोकतंत्र रक्षकों को सम्मान दिलाया। वहीं नगर के मैनाताली निवासी आर्शी सलाम ने कहा कि उनके पिता मंसूर सलाम समाजवादी पार्टी के संस्थापकों में शामिल रहे। 19 सितंबर 2002 को उनकी हत्या कर दी गई। इस घटना को मुलायम सिंह यादव ने गंभीरता से लिया और मामले की जांच कराई। यही नहीं दो जनवरी 2003 को मुलायम सिंह घर पहुंचे और हम लोगों को सांत्वना दी। कुढे खुर्द निवासी सेवानिवृत्त रेलकर्मी रामप्रसाद यादव ने कहा कि मुलायम सिंह यादव पिछड़ों से मसीहा थे। वहीं अतायस्तगंज निवासी रामजनम यादव ने कहा कि मुलायम सिंह यादव का व्यक्तित्व ऐसा था कि वे जिससे एक बार मिलते थे, उसे अपना बना लेते थे।
2019 में लखनऊ में सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव से आशीर्वाद लेते छात्र सभा के जिलाध्यक्ष यादवेश यादव- फोटो : CHANDAULI