तापमान बढ़ने लगा है। इसके साथ ही मच्छरों की आबादी भी बढ़ रही है। मच्छरों के संगीत से नींद नहीं आ रही है और झपकी आ भी जाए तो वे डंक मार कर जगा देते हैं। लोग ठीक से सो नहीं पा रहे हैं लेकिन नगर निकाय के अधिकारी आराम से हैं। न कहीं ठीक से फागिंग कराई जा रही है और न ही मच्छरमार दवाओं का छिड़काव। मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया मच्छरों के काटने से होेते हैं। मगर लोग आजकल मच्छरों की बढ़ती संख्या के चलते अनिद्रा के शिकार हो रहे हैं। मौसम गर्म हो रहा है। ऐसे में लोग चादर या कंबल नहीं ओढ़ पा रहे हैं। मच्छरों की आबादी रोजाना दुगना-तिगुना की रफ्तार से बढ़ रही है। कोई मच्छरदानी लगाकर सोए तो मच्छरों के अंडे सुबह तक बच्चों में तब्दील हो जाते हैं और मच्छरदानी में उड़ने लगते हैं। उनके उड़ने की ध्वनि नींद उड़ा देती है।
तापमान 28 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। इसमें मच्छरों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। नगर में नाले, नालियों की नियमित सफाई नहीं हो रही है। जगह-जगह फैली गंदगी में मच्छर, पनप रहे हैं। सबसे ज्यादा मच्छरों का प्रकोप वार्ड नंबर सात किदवई नगर में है। यहां सड़सा बाबा पोखरे में गंदगी के कारण मच्छर पनप रहे हैं। वार्ड नंबर 14 गांधीनगर में सिंचाई विभाग का खुला नाला है।
मच्छरों को भगाने की अगरबत्ती, रिपलेंट और लिक्विड का कारोबार जरूर बढ़ गया हो लेकिन वे भी मच्छरों को पूरी तरह से हतोत्साहित करने में कामयाब नहीं हैं। मच्छर केवल नींद में ही खलल डालते तो कोई बात नहीं थी लेकिन उनकी वजह से मच्छरजनित डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया के फैलने का भी खतरा बना हुआ है।
नगर पंचायत की तरफ से वार्डों के नालियों में मैलाथियान का छिड़काव नहीं कराया गया है। फॉगिंग के मामले में भी खानापूर्ति की जा रही है। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय के समीप सर्विस रोड के किनारे से खुली नाली भी मच्छरों के उत्पादन के मुफीद है। इससे हादसे का भी डर बना रहता है। शाम होते ही मच्छरों भिननिभाने लगते हैं। नगर पालिकाकर्मी इकबाल अहमद का दावा है कि नगर के नालियों में मैलाथियान पाउडर व वार्डो में फॉगिंग कराई जा रही है। मगर उससे मच्छरों की संख्या में कमी नहीं आ रही है।