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किताब और ड्रेस में पहले ही लग गए पैसे, बढ़ी फीस, तो भरेंगे कैसे

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पीडीडीयू नगर । प्रदेश सरकार ने निजी स्कूलों पर फीस बढ़ोतरी को लगी रोक हटा दी है। अब निजी स्कूल वार्षिक शैक्षणिक शुल्क बढ़ा सकेंगे। इस आदेश के बाद से अभिभावकों की जेब पर बोझ बढ़ने की संभावना बढ़ गई है। अभिभावकों ने इस शासनादेश का अव्यवहारिक बताया है। अभिभावकों के अनुुसार ड्रेेस, कॉपी- किताब के नाम पर पहले की उनकी जेब कट चुकी है। अब वार्षिक फीस बढ़ाने के नाम पर होने वाली वृद्धि के अभिभावकों पर बोझ काफी बढ़ जाएगा। कोरोना के कारण निजी स्कूलों की शुल्क बढ़ोतरी पर लगाई गई रोक हटा ली गई है। बीते दो शैक्षिक सत्रों वर्ष 2020-21 और वर्ष 2021-22 में कोविड के कारण फीस नहीं बढ़ाई गई थी। अब वर्तमान शैक्षिक सत्र 2022-23 से फीस बढ़ने से अभिभावकों की जेब पर बोझ बढ़ेगा। उन्हें अब ज्यादा फीस देनी होगी। इसे लेकर अभिभावकों में काफी नाराजगी है। अभिभावकों के अनुसार वार्षिक शुल्क बढ़ोतरी का आदेश दिखाकर निजी स्कूलों द्वारा तिमाही और छमाही फीस में भी वृद्धि किये जाने आशंका भी बढ़ गई है। नगर निवासी संजय रस्तोगी ने कहा कि कोविड काल में भी पूरी फीस दी गई। स्कूल शुरू होते ही पहली तिमाही की फीस व वार्षिक शुल्क, ड्रेस, जूते-मोजे, किताब-कापियां आदि सबकुछ मनमाने दाम और शर्तों पर में खरीदा। अब फीस वृद्धि से अभिभावकों पर अतिरिक्त भार पड़ेगा। अभिषेक खत्री ने कहा कि निजी स्कूलों में तमाम तरह की एक्टिविटी के नाम कुछ न कुछ शुल्क वसूला जाता है। इसके बाद पढ़ाई के नाम पर अन्य काफी खर्च हो जाते है। ऐसे में फीस वृद्धि से लोगों का बजट बिगड़ जाएगा। रामानंद सेठ ने कहा कि सरकार की ओर से इस वक्त फीस की वृद्धि पर लगाई गई रोक को हटाना ठीक निर्णय नहीं है। सबसे अधिक परेशानी उन लोगों को होगी जिनके दो बच्चे स्कूलों में पढ़ते है। सियाराम यादव ने कहा कि फीस वृद्धि पर रोक हटाये जाने से निजी स्कूलों को मनमाने तरीके से फीस व अन्य प्रकार शुल्क में वृद्धि का मौका मिल जाएगा। निजी स्कूल संचालक डीजल के बढ़े दामों के नाम पर बसों का किराया भी बढ़ाने की तैयारी में है।
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