बैरा जंगल में वन भूमि पर झोपड़ी बनाकर किया जा रहा अतिक्रमण
राजदरी। वनांचल के नाम से प्रसिद्ध चंदौली जिले की हरियाली पर संकट गहराता जा रहा है। करोड़ों पौधों के रोपण और पर्यावरण संरक्षण के तमाम सरकारी दावों के बावजूद जमीन पर वन क्षेत्र लगातार सिकुड़ रहा है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की भारतीय वन सर्वेक्षण (एफएसआई) की ताजा रिपोर्ट ने जिले में वन संरक्षण के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जिले में अब भी 285.994 हेक्टेयर बेशकीमती वनभूमि भू-माफिया और अतिक्रमणकारियों के अवैध कब्जे में है। भौगोलिक आंकड़ों के अनुसार, चंदौली जिले का कुल क्षेत्रफल 2,541 वर्ग किलोमीटर है। इसमें से 553.48 वर्ग किलोमीटर (लगभग 21.78 प्रतिशत) क्षेत्र ही वनाच्छादित बचा है। इस वन क्षेत्र में मात्र 7.91 वर्ग किलोमीटर घना वन है, जबकि 361.60 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र खुले वन के रूप में बचा है। जंगलों के इस तेजी से घटते दायरे के कारण स्थानीय पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ने का खतरा बढ़ गया है। वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि अवैध कटान और वनभूमि पर खेती या व्यावसायिक उपयोग के लिए हो रहे अवैध कब्जे जैव विविधता को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं।