ीडीडीयू नगर के यूरोपियन कालोनी स्थित चर्च में क्रिसमस ट्री के पास सेल्फी लेतीं युवतियां।
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पीडीडीयू नगर। संसार को प्रेम का संदेश देने वाले प्रभु यीशु का जन्मदिन क्रिसमस शुक्रवार को नगर सहित पूरे जिले में धूम-धाम से मनाया गया। गिरजा घरों में प्रभु के जन्म की झांकी सजाई गई और विशेष प्रार्थना सभा हुई। मसीही समुदाय के साथ अन्य धर्मावलंबियों ने भी चर्च में पहुंचकर विशेष आशीष लिया और यीशु के समक्ष कैंडिल जलाकर दुआ मांगी। वहीं इस बार कोरोना संक्रमण की वजह से गिरजाघरों में मेला नहीं लगा। चर्च को भी कुछ समय के ही खोला गया लेकिन इसमें भी दर्शन के लिए कतार लगी। प्रेम, करुणा का संदेश देने वाले पाप के उद्धारक प्रभु यीशु का जन्म बृहस्पतिवार को आधी रात के वक्त हुआ। हालांकि कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए पहले ही साधारण ढंग से जन्मोत्सव मनाने की घोषणा की गई थी। जन्मोत्सव पर ही कम लोगों को ही चर्च पहुंचने की इजाजत मिली। शुक्रवार को क्रिसमस पर पीडीडीयू नगर सहित जिले के सभी चर्च में मेला नहीं लगा। प्रति वर्ष नगर के यूरोपियन कॉलोनी स्थित बाल यीशु तीर्थ (कैथोलिक चर्च) में क्रिसमस पर मेला लगता था। इस वर्ष इस पर रोक लगा दी गई। बावजूद इसके सुबह आठ बजे एक बार फिर ईसाई समुदाय के लोग एकत्र हुए और पूजन अर्चन के बाद धर्मगुरु से आशीर्वाद लिया। इस मौके पर यहां के फादर विपिन सीजे ने बताया कि पवित्र बाइबल के अनुसार सभी मनुष्य पाप और मृत्यु की दासता में हैं। हमें मुक्ति और जीवन का मार्ग दिखाने के लिए स्वयं ईस पुत्र को धरती पर आना पड़ा। उन्होंने कहा कि गौशाला हमें उस परिस्थिति की याद दिलाती है जो प्रभु के जन्म के साथ साथ उनके जन्म के उद्देश्य को यथार्थता को भी प्रासंगिक करता है। कहा कि इस वर्ष कोरोना जैसी महामारी ने फिर से दिखा दिया है कि ईश्वरीय सत्ता सबसे उपर है। हम सभी इस महामारी से निजात दिलाने की प्रार्थना करते हैं। क्रिसमस के मौके पर चर्च में प्रभु यीशु के जन्म की झांकी और बाल यीशु के जन्म की झांकी और बाल यीशु के दर्शन के लिए मसीही समुदाय के अलावा अन्य धर्म के लोगों की भीड़ जुटी। लोगों ने चर्च में यहां कैंडल जलाए और प्रार्थना की। हालांकि चर्च के गेट शाम पांच बजे बंद कर दिए गए। मेला न लगने से लोगों को निराशा हुई। वहीं मसीही समुदाय के लोगों ने घरों में केक काटा और एक दूसरे का मुंह मीठा कराया। लोगों ने कोरोना जैसी महामारी से निजात दिलाने की प्रार्थना की। घरों में दिन भर दावतों का दौर चलता रहा।