कंदवा। क्षेत्र के चिरईगांव में चल रहे चातुर्मास यज्ञ के दौरान बुधवार को त्रिदंडी स्वामी के शिष्य सुंदर राज महाराज ने श्रोताओं को कथा गंगा की अविरल धारा में खूब डुबकी लगवाई। कथा सुनकर श्रोता भावविभोर हो उठे। कथा वाचक ने कहा कि कलयुग में मनुष्य मात्र भगवान के नाम का मात्र उच्चारण भी कर ले तो भी उसे पापों से मुक्ति मिल जाती है। ‘कलयुग केवल नाम अधारा-सुमिरि सुमिरि नर उतरहिं पारा।’अर्थात कलयुग में केवल ईश्वर के नाम का सुमिरन करने से मात्र से मनुष्य का उद्धार हो जाता है। कहा कि गृहस्थ आश्रम में रहकर लोगों की ज्यादा सेवा की जा सकती है। इस आश्रम में रहकर मानव को ईश्वर भक्ति के लिए समय अवश्य निकालना चाहिए। कहा कि कलयुग में मनुष्य अपने कर्मों से भटक चुका है। बूढ़े माता-पिता आज अपने ही घरों में एकाकीपन का जीवन जीने को विवश हैं। ऐसे में कथा के श्रवण से भटके हुए प्राणियों को सन्मार्ग मिल सकता है। केवल तिलक लगाने से कोई संत-महात्मा नहीं हो सकता। उसके अंदर परोपकार की भावना का होना आवश्यक है। इस दौरान रेनू सिंह, उषा, कमला, रीता, आकांक्षा, सोनाली, मृत्युंजय, संतोष, वीर प्रताप, अंगद यादव, कुंदन, शिवाजी मौजूद रहे।
रिपोर्ट- सुनील सिंह
संपादन- धनंजय
बाइट- 1134