शादियों के मौसम में डीजे की तेज आवाज बीमार लोगों के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। खास दोस्त से कमजोर दिल वाले ह्रदय रोगियों के लिए डीजे की तेज आवाज जानलेवा साबित हो सकती है। डीजे की तेज आवाज पर प्रतिबंध के बाद भी इस पर अंकुश नहीं लगाया जा सका है। डीजे से 120 से 130 डेसीबल तक शोर पैदा होता है जो खतरनाक ध्वनि प्रदूषण की श्रेणी में आता है। इस दौरान ध्वनि में कंपन बेहद अधिक बढ़ जाती है। यही कंपन हृदय रोगियों के लिए जानलेवा होता है। सबसे खतरनाक तो तब हो जाता है जब डीजे की धुन पर नाचने वाले घंटों एक ही जगह पर खड़े होकर मनोरंजन करते हैं। विवाह समारोह में डीजे बजाना फैशन हो गया है। इसके अलावा सभा, समारोह और धार्मिक उत्सवों के दौरान गली-मोहल्लों में विभिन्न समितियों द्वारा मनोरंजन के नाम पर डीजे का उपयोग किया जा रहा है। डीजे के लिए पहले सामान्य जनरेटर का उपयोग किया जाता था। समय के साथ इसमें भी बदलाव हो गया है। बड़े-बड़े साउंड बाक्स के जरिए बजने वाले गानों की धुन भी कुछ अलग अंदाज की होती है। डीजे की तेज आवाज ऐसी होती है कि घरों की दीवारें, दीवारों पर टंगे बर्तन और जमीन में कंपन सा महसूस होता है। पई स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. राजेश सिंह ने बताया कि 120 डेसीबल और इससे ज्यादा ध्वनि प्रदूषण खतरनाक स्तर का है। 120 डेसिबल ध्वनि प्रदूषण होने की स्थिति में हृदय की धड़कन बढ़ जाती है और दिल तेजी से धड़कने लगता है। इससे भय के साथ बेचैनी होने लगती है।