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जवाब देने लगे हैंडपंप, सावन में गहराया पानी का संकट

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जिले में भूजल स्तर के लगातार नीचे खिसकने से हैंडपंप भी जवाब देने लगे हैं। सावन में बारिश न होना भी इसका एक कारण माना जा रहा है। इससे ग्रामीण इलाकों में पेयजल संकट गहराने लगा है। वर्तमान में लगभग पांच हजार हैंडपंप सूख चुके हैं। वहीं कुछ से बालू और गंदा पानी निकल रहा है। गंगा नदी के तटवर्ती इलाकों में भी हैंडपंपों के पानी छोड़ने से ग्रामीण पानी की समस्या से जूझ रहे हैं।
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लोगों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए सरकार की ओर से जिले में इंडिया मार्का हैंडपंप लगाए गए हैं। जिले के ग्रामीण व शहरी क्षेत्र में पेयजल के लिए करीब 28 हजार 900 हैंडपंप लगाए गए हैं। वर्तमान में इनमें लगभग पांच हजार हैंडपंपों से या तो पानी नहीं आ रहा है या फिर वे रिबोर के लायक हैं। पंचायत राज विभाग ग्राम पंचायत के माध्यम से इन हैंडपंपों को रिबोर या मरम्मत कराता है मगर अब तक हैंडपंपों को ठीक करने का काम ही शुरू नहीं हो सका है। ऐसे में तेज धूप और गर्मी से परेशान लोग पानी के लिए भटकने लगे हैं। जिले की आबादी लगभग 20 लाख है। मैदानी इलाकों में लगातार गिरता जा रहा भूमिगत जल का स्तर सबसे बड़ी समस्या का कारण है।
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