पीडीडीयू नगर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सात जुलाई को डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का उद्घाटन वाराणसी से करेंगे। इसके बनने के बाद मालगाड़ियों की रफ्तार बढ़ेगी। मालगाड़ियों के अलग लाइन पर चलने के कारण यात्री ट्रेनों की राह भी आसान होगी। यात्री गाड़ियों की संख्या बड़ाई जा सकेगी।
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना डीडीयू मंडल में 13 वर्षों में पूरी हुई। लगभग 6767 करोड़ की लागत से पं. दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन से चिरैलापौथु तक लाइन बिछाई गई है। इसका लोकार्पण सात जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वारामसी से करेंगे। साथ ही वे पीडीडीयू जंक्शन से व्यासनगर तक 8.6 किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर का भी शिलान्यास करेंगे। इसके चालू होने से मुख्य लाइन से मालगाड़ियों का बोझ हट जाएगा। यात्री ट्रेनें समय से चल सकेेंगी और उनकी संख्या बढ़ेगी। डीएफसीसी लाइन पर सौ किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से मालगाड़ियों चलेंगी। इससे ज्यादा माल की ढुलाई हो पाएगी।
मालगाड़ियों के बोझ को मुख्य लाइन से कम करने के लिए डेढ़ दशक पहले डीएफसीसी (डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर) की योजना बनाई गई थी। पश्चिम बंगाल के दानकुनी से पंजाब के लुधियाना तक 1875 किमी लंबी ईस्टर्न लाइन बिछाई जानी है। वर्ष 2009 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी ने डेहरी आन सोन इसकी आधारशिला रखी थी।
पं. दीनदयाल उपाध्याय रेल मंडल में चिरैला पौथू तक 137 किमी लाइन बिछाने में 13 साल लग गए। इसमें 276 पुलों, आठ आरयूबी (रेल अंडर ब्रिज) और 36 आरओबी (रेलवे ओवर ब्रिज) का निर्माण किया गया है। अब तक 24 ओवर ब्रिज का निर्माण पूरा हो चुका है जबकि 12 निर्माणाधीन हैं। पीडीडीयू सोननगर सेक्शन पर आठ नए रेलवे स्टेशन बनाए गए हैं। इसमें पांच जंक्शन हैं। मई में इसका काम पूरा हो चुका है और मालगाड़ियों का परिचालन भी शुरू हो गया है।
प्रधानमंत्री पीडीडीयू जंक्शन से व्यासनगर तक बनने वाले 8.6 किमी लंबे फ्लाईओवर का शिलान्यास करेंगे। तकरीबन 525 करोड़ की लागत से बनने वाले इस फ्लाईओवर से वाराणसी की ओर जाने वाली मालगाड़ियां संचालित की जाएंगी। इससे प्रयागराज और वाराणसी रूट की मुख्यलाइन पर यात्री ट्रेनों का संचालन आसान हो जाएगा। अत्यधिक घुमाव न होने के कारण मालगाडियां भी तेज गति से चलेंगी।
औसत रफ्तार 60 से 70 किमी होगी
फिलहाल मालगाड़ियों की औसत रफ्तार 25 से 30 किलोमीटर प्रतिघंटा है। डीएफसीसी पर मालगाड़ियां सौ किमी की रफ्तार से दौड़ सकेगी। इस लाइन पर मालगाड़ियों की रफ्तार औसतन 60 से 70 किमी होगी। वर्तमान में मुख्य रेलवे लाइन पर क्षमता से डेढ गुना अधिक दबाव है। मुख्य लाइन से मालगाड़ियों के हटने से यह दबाव कम होगा तो यात्री ट्रेनों की गति भी बढ़ जाएगी। रेलवे लाइन की मरम्मत करने में भी आसानी होगी।